
लोग गायों को खूंठे से बांधे. गाय सड़क पर छुट्टा नहीं घूमे. गायों को भी दिनभर हरा चारा खाने को मिले, इसके लिए यूपी की सरकार लगातार कई तरह की योजनाएं शुरू कर रही है. सरकार की नई योजना गौमूत्र खरीदने की है. सरकार गौपालकों से गौमूत्र खरीदेगी. एक लीटर गौमूत्र के बदले में 10 रुपये दिए जाएंगे. साथ ही दो रुपये लीटर का बोनस भी दिया जाएगा. सरकार की योजना है कि गौमूत्र से कई तरह के प्रोडक्ट बनाकर बाजार में बेचे जाएंगे. लेकिन गाय एक्सपर्ट की मानें तो गाय के मूत्र को इकट्ठा करना इतना आसान नहीं है.
पहली बात तो ये कि गाय के मूत्र विसर्जन का कोई वक्त तय नहीं होता है. दूसरा अगर गौमूत्र जमीन पर गिरा तो फिर वो दूषित और संक्रमित हो जाता है. और सबसे अहम बात ये कि गाय द्वारा सुबह के वक्त किया जाने वाला मूत्र ही ज्यादा प्रभावी होता है. गौरतलब रहे कि यूपी सरकार ने देसी नस्ल की गायों के मूत्र को खरीदने की एक योजना शुरू की है.
काऊ रिसर्च से जुड़े साइंटिस्ट बताते हैं कि एक देसी नस्ल की गाय जैसे गिर, साहीवाल, थारपारकर, राठी, हरियाणवी, रेड सिंधी आदि दिनभर में 10 से 15 लीटर तक गौमूत्र का विजर्सन करती है. अगर एक बार की बात करें तो गाय एक बार में 500 ग्राम से लेकर 750 ग्राम तक मूत्र विसर्जन करती है. खास बात ये है कि गाय दूध देने वाली है, गाय गर्भवती है, गाय ड्राई यानि दूध नहीं देती है ऐसे बहुत सारे कारण होते है जिस पर मूत्र विसर्जन की मात्रा निर्भर करती है. वहीं दूसरी और गाय का खानपान भी उसके मूत्र विजर्सन की मात्रा को तय करता है.
काऊ एक्सपर्ट बताते हैं कि एक हेल्दी देसी नस्ल की गाय को दिनभर में पीने के लिए साफ और ताजा पानी चाहिए होता है. एक गाय को दिनभर में 35 से 40 लीटर तक पीने का पानी चाहिए होता है. अगर इससे कम दिया तो इसका सीधा असर उसके मूत्र विसर्जन की मात्रा पर पड़ेगा. क्योंकि गाय जो पानी पीती है उसमे से कुछ हिस्सा गोबर के साथ बाहर निकल जाता है. कुछ दूसरी शारीरिक क्रिपयों में चला जाता है. हालांकि गायों को जो हरा चारा खाने को दिया जाता है उससे भी गायों के शरीर में पानी की पूर्ति होती है.
काऊ साइंटिस्ट बताते हैं कि अगर गाय के मूत्र से कोई प्रोडक्ट बनाना है तो गौमूत्र का प्योर होना जरूरी है. जैसे गाय जब सुबह के वक्त दिन का पहला मूत्र विसर्जन करती है तो वो बहुत प्रभावी होता है. इसे स्टीम मूत्र कहा जाता है. लेकिन, जैसे ही गाय मूत्र विसर्जन करे तो उसे सीधे बर्तन में लेने की जरूरत होती है, अगर ये जमीन पर गिर गया तो फिर किसी काम का नहीं रह जाता है.
काऊ साइंटिस्ट से ने बताया कि एनिमल शेड में गाय सुबह के वक्त बैठी होती हैं. लेकिन जैसे ही गौपालक हाथ में बर्तन लेकर दूध निकालने के लिए जाता है तो गाय पशुपालक को और बर्तन की आवाज को सुनकर खड़ी हो जाती हैं. और जैसे ही रातभर की बैठी गाय सुबह खड़ी होती है तो सबसे पहले मूत्र विसर्जन करती है. और गायों में एक आदत होती है कि जब एक गाय मूत्र विसर्जन करती है तो दूसरी गाय उसकी देखा-देखी खुद भी मूत्र विसर्जन करने लगती हैं.
केन्द्र सरकार की सक रिपोर्ट बताती है कि देश में देसी नस्ल की 14 करोड़ से ज्यादा गाय हैं. संकर नस्ल की 50 लाख से ज्यादा गाय तो देशभर में सड़कों पर छुट्ठा घूम रही हैं. इस आंकड़े में विदेशी नस्ल की जर्सी और होल्स्टीन फ्रीजन गाय शामिल नहीं है.
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