Milk Production: बरसात में पतला नहीं होगा दूध, जरूर अपनाएं एक्सपर्ट के ये टिप्स 

Milk Production: बरसात में पतला नहीं होगा दूध, जरूर अपनाएं एक्सपर्ट के ये टिप्स 

Milk Production एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुपालकों की लापरवाही के चलते न सिर्फ दूध पतला होता है, बल्कि पशुओं का पेट भी खराब हो जाता है. पेट की परेशानी के चलते दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और ये सब होता है बरसात के दिनों में बदली गई पशु की खुराक के चलते. जिसे पशुपालक बहुत मामूली सी बात समझकर छोड़ देता है. 

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Aug 13, 2026,
  • Updated Aug 13, 2026, 5:03 PM IST

ग्राहक ही नहीं बरसात के दिनों में पशुपालकों की भी ये शि‍कायत रहती है कि गाय-भैंस का दूध पतला हो जाता है. पशुपालकों की परेशानी तो इसीलिए भी और ज्यादा बढ़ जाती है कि ग्राहक उनसे सीधे शि‍कायत करने पहुंच जाता है. ग्राहक का सीधा आरोप होता है कि पशुपालक दूध में पानी मिला रहा है. ऐसे में पशुपालक लाख सफाई देता रहे कि पशु ही पतला दूध दे रहा है तो ऐसे में वो क्या करे. अगर इस पर एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो वो ये गलती पशुपालक की ही बताते हैं. इसलिए नहीं की दूध में पानी मिला दिया होगा, बल्कि इसलिए कि बरसात के दिनों में अक्सर पशुपालक पशुओं को चारा खि‍लाने का तरीका नहीं बदलते हैं. 

चारों तरफ हरे चारे की पैदावार खूब होती है तो पशुपालक पशुओं को जमकर हरा चारा खि‍लाते हैं. लेकिन खि‍लाते वक्त ये भूल जाते हैं कि हरे चारे में नमी बहुत ज्यादा होती है, खासतौर से बरसाती हरे चारे में. बरसात के दिनों मे पशुओं को दिए जाने वाले हरे चारे और पीने के पानी में संतुलन बनाकर रखना चाहिए. अगर दोनों में से कुछ भी ज्यादा हुआ तो फिर उसका असर पशुओं के उत्पादन और उनकी सेहत पर देखने को मिलता है. इसलिए खासतौर से बरसात के दिनों में पशुओं को हरा चारा एक्सपर्ट के मुताबिक ही खाने को दें.

हरे चारे संग खि‍लाएं सूखा चारा

फोडर एक्सपर्ट डॉ. राजनरायण वर्मा का कहना है कि ज्यादातर हरे चारे में भरपूर मात्रा में पानी होता है. अगर एक किलो हरे चारे क बात करें तो तीन से चार लीटर तक पानी पाया जाता है. बरसात में तो वैसे भी हरा चारा पानी में भीगा रहता है. इस मौसम में हर चारा भी बहुत होता है. और पशुपालक यही गलती करते हैं कि वो पशुओं को ज्यादा से ज्यादा हरा चारा खि‍लाने लगते हैं. बस इसी गलती की वजह से दूध पतला हो जाता है. पशु पानी तो पीता ही है, साथ में हरे चारे की वजह से भी शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है.

इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि जब हमारा पशु हरा चारा खा रहा हो या बाहर चरने के लिए जा रहा हो तो हम पहले उसे सूखा चारा और थोड़ा बहुत मिनरल्स जरूर दें. सूखा चारा खूब खिलाने से हरे चारे में मौजूद नमी का स्तर सामान्य हो जाता है. वहीं मिनरल्स देने से दूध में फैट और दूसरी चीजों का स्तर भी बढ़ जाता है और दूध की क्वा‍लिटी खराब नहीं होती है. 

पशु कौनसा है और उसकी उम्र कितनी है, ये सब बातें देखने के बाद ही उसे हरा, सूखा चारा और दाना खाने को दिया जाता है. अगर ज्यादा हरा चारा खाने से पशु को दस्त हो जाएं तो फौरन ही डाक्टर की सलाह लें. पेट में अफरा हो तो बड़े पशु को 500 ग्राम सरसों के तेल में 50 ग्राम तारपीन का तेल मिलाकर पिलाया जा सकता है. साथ ही दलहनी हरे चारे को थोड़ा सा सुखाकर खिलाएं तो वो नुकसान नहीं करेगा. क्योंकि सुखाने से उसकी नमी कम हो जाएगी.

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