Green Fodder: सर्दियों में गाय-भैंस को नहीं होगी हरे चारे की कमी, अभी से कर लें ये तैयारी 

Green Fodder: सर्दियों में गाय-भैंस को नहीं होगी हरे चारे की कमी, अभी से कर लें ये तैयारी 

Green Fodder पशु को लगातार एक ही तरह का हरा चारा देना ज्यादा फायदेमंद नहीं होता है. बल्कि होना ये चाहिए कि पशुओं का दिनभर का चारा ऐसा हो जो उसकी जरूरत के सभी तत्वों को पूरा करता हो. लेकिन सर्दियों में ऐसे चारे की कमी रहती है. लेकिन इस कमी को दूर करने के लिए चारा एक्सपर्ट के मुताबिक सितम्बर में इस तरह के चारा की फसल की बुवाई की जा सकती है.

पशुओं के लिए हरा और सस्ता चारापशुओं के लिए हरा और सस्ता चारा
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Aug 14, 2026,
  • Updated Aug 14, 2026, 9:00 AM IST

दूध देने वाली गाय-भैंस हों या फिर मीट के लिए पाले जाने वाले भेड़-बकरी, सभी को उत्पादन के लिए हरे चारे की जरूरत होती है. जब तक रोजाना की खुराक में हरा चारा शामिल नहीं होगा तो बैलेंस डाइट तैयार नहीं होगी. और एनिमल न्यूट्रीशन एक्सपर्ट का भी मानना है कि पशुओं की रोजाना की खुराक में कर्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स का होना जरूरी है. क्योंकि खुराक में जब तक ये चीजें शामिल नहीं होंगी तो उत्पादन के लिए पशुओं की उस तरह से ग्रोथ नहीं होगी. क्योंकि बैलेंस डाइट मिलने पर ही दूध-मीट की क्वालिटी सुधरने के साथ ही उत्पादन भी बढ़ता है. 

दूध देने वाले और मीट के लिए पाले जाने वाले पशुओं को दिनभर की खुराक दिए जाने के दौरान इस बात की जानकारी होना भी जरूरी है कि हम उसे जो चारा खि‍ला रहे है उसमे जरूरी पोषक तत्व हैं या नहीं. या फिर कौन-कौनसा चारा खि‍लाने से उन पोषक तत्वों की कमी पूरी होगी. ऐसा करने से ही उत्पादन बढ़ने के साथ ही दूध-मीट की लागत कम होती है. इसलिए सर्दियों में इस तरह के हरे चारे की कोई कमी नहीं हो इसके लिए सितम्बर में लगाए जाने वाले हरे चारे की तैयारी अभी से कर लें.  

दलहनी चारा भरेगा पशुओं का पेट 

चारा एक्सपर्ट डॉ. एमएल कुमार का कहना है कि हरे चारे की एक फसल कम से कम ऐसी होनी चाहिए जो एक बार लगाने के बाद कई साल तक उपज दे. जैसे नेपियर घास को बहुवर्षिय चारा कहा जाता है. बहुवर्षिय चारा वो होता है जो एक बार लगाने के बाद लम्बे वक्त तक उपज देता है. नेपियर घास भी उसी में से एक है. एक बार नेपियर घास लगाने के बाद करीब पांच साल तक हरा चारा लिया जा सकता है.

लेकिन ऐसा भी नहीं किया जा सकता है कि पशुओं को सिर्फ नेपियर घास ही खि‍लाते रहें. अगर आप पशु को नेपियर घास दे रहे हैं तो उसके साथ उसे दलहनी चारा भी खि‍लाएं. इसके लिए सितम्बर में नेपियर घास के साथ लोबिया लगाया जा सकता है.

हर मौसम में आप नेपियर के साथ सीजन के हिसाब से दूसरा हरा चारा लगा सकते हैं. ऐसा करने से पशु को नेपियर घास से कर्बोहाइड्रेड है तो लोबिया से प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स मिलते हैं. और इसी तरह की खुराक से भेड़-बकरी में मीट की ग्रोथ होती है तो गाय-भैंस में दूध का उत्पादन बढ़ता है. 

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