
बकरीद पर कुर्बानी के लिए बकरों की 10 से ज्यादा ऐसी नस्ल हैं जिनकी बहुत ज्यादा डिमांड रहती है. हालांकि बकरों की देश में 40 से ज्यादा नस्ल हैं, लेकिन बकरीद पर सबसे ज्यादा बिकने वालीं 8 से 10 नस्ल ही होती हैं. इन्हीं में से एक नस्ल है तोतापरी. दिल्ली-एनसीआर से लगे इलाकों में तोतापरी की बहुत ज्यादा डिमांड रहती है. दिल्ली-एनसीआर में बकरों की सबसे बड़ी मंडी जामा मस्जिद, के पास लगती है. इसी मंडी में कुर्बानी के लिए बकरे खरीदने वाले सबसे पहले तोतापरी बकरों की डिमांड करते हैं.
उसकी वजह ये है कि तोतापरी बकरे वजन, हाईट-हेल्द और खूबसूरती के मानकों पर अव्वल होते हैं. और इन्हीं खूबियों के चलते पशुपालकों को बकरा मंडियों में तोतापरी बकरे के अच्छे दाम मिल जाते हैं. आम दिनों में 25 से 30 किलो वजन वाला बकरा जहां 15 से 18 हजार रुपये का मिल जाता है, वही बकरीद पर 20 से 25 हजार रुपये तक का मिलता है.
बकरों के एक्सपर्ट और गोट ब्रीडिंग पर काम करने वाले मथुरा निवासी राशिद ने किसान तक को बताया कि तोतापरी बकरे खासतौर पर मेवात और उससे लगे राजस्थान के अलवर में पाले जाते हैं. तोतापरी बकरों की तीन बड़ी खासियत होती हैं. एक तो ये कि दूसरे सामान्य बकरों के मुकाबले इनकी हाइट ज्यादा होती है. दूसरा हेल्थ के हिसाब से भी 100 किलो और उसके आसपास के होते हैं. तीसरा ये कि इनकी नाक तोते की तरह से ऊपर की ओर उठी हुई होती है और होंठ नीचे की ओर दबे हुए. जिसके चलते इनकी खूबसूरती बढ़ जाती है. कई अलग-अलग रंग में होने के चलते भी इनकी खूबसूरती और बढ़ जाती है.
राशिद ने बताया कि तोतापरी नस्ल अभी रजिस्टर्ड नहीं हुई है. लेकिन राजस्थान के अलवर और हरियाणा के मेवात में इसका पालन खूब किया जाता है. प्राकृतिक तौर पर ही इस नस्ल के बकरे अच्छी हाइट और हेल्थ के होते हैं, लेकिन अगर इनकी खिलाई-पिलाई और अच्छे तरह से हो जाए तो हाइट और हेल्थ और ज्यादा बढ़ जाते हैं. इसके चलते इनके दाम भी ज्यादा होते हैं. इस दाम के बकरे हर शहर में नहीं बिक पाते हैं. यही वजह है कि दिल्ली -मुम्बई में इनकी खासी डिमांड रहती है.
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