
मध्यप्रदेश अब देश के डेयरी सेक्टर में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है. राज्य सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, डेयरी नेटवर्क मजबूत करने और पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा है कि मध्यप्रदेश को “मिल्क कैपिटल” बनाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सहकारी समितियों के विस्तार, आधुनिक डेयरी प्लांट, किसानों को बेहतर भुगतान और पशुपालन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
प्रदेश में दुग्ध संकलन के आंकड़ों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में प्रतिदिन औसतन 9.67 लाख किलोग्राम दूध का संकलन हो रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 11 प्रतिशत अधिक है.
वहीं बीते छह महीनों के दौरान औसत दैनिक दूध संकलन 11 लाख किलोग्राम से अधिक दर्ज किया गया. सरकार का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी गतिविधियों के विस्तार और दुग्ध समितियों की बढ़ती संख्या के कारण यह उपलब्धि संभव हो सकी है.
डेयरी क्षेत्र में सुधार का सबसे बड़ा फायदा दुग्ध उत्पादक किसानों को मिल रहा है. वर्ष 2024-25 में जहां किसानों को 1398 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 1609 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 प्रतिशत अधिक है.
सरकार ने दूध खरीद भुगतान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाया है. इसके साथ ही विभिन्न दुग्ध संघों में दूध खरीद दरों में 2.50 रुपए से 8.50 रुपए प्रति लीटर तक की वृद्धि की गई है.इससे पशुपालकों की आमदनी बढ़ी है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर है, लेकिन सरकार का लक्ष्य प्रदेश को पहले स्थान पर पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ तकनीकी सुधारों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है.
प्रदेश में अब तक 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है.इससे गांव-गांव तक दूध संग्रहण नेटवर्क का विस्तार हुआ है और छोटे पशुपालकों को सीधे डेयरी प्रणाली से जोड़ने में मदद मिली है.
राज्य सरकार डेयरी उद्योग के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से काम कर रही है. ग्वालियर डेयरी प्लांट का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जबकि लंबे समय से बंद पड़े शिवपुरी डेयरी प्लांट को फिर से सक्रिय किया गया है.
इसी तरह इंदौर में प्रतिदिन 3 लाख लीटर क्षमता वाले आधुनिक मिल्क पाउडर प्लांट की शुरुआत की गई है. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से दूध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा.
प्रदेश के लोकप्रिय डेयरी ब्रांड Sanchi को मजबूत बनाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं. बैठक में बताया गया कि सांची उत्पादों की बिक्री में लगातार वृद्धि हो रही है.
विशेष रूप से घी की बिक्री में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.इसके अलावा पनीर, दही, छाछ और फ्लेवर्ड दूध जैसे उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ी है.बेहतर पैकेजिंग, आधुनिक ब्रांडिंग और मार्केटिंग रणनीति के जरिए सांची को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है.
बैठक में राज्य सरकार द्वारा संचालित कई महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा भी की गई.इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनू योजना, आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, क्षीरधारा ग्राम योजना और दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान प्रमुख रहे.
इसके अलावा पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, चारा उत्पादन, पशु पोषण, बेहतर नस्ल सुधार और स्वावलंबी गौशालाओं के विकास जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेयरी क्षेत्र को रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए.