
घरेलू और इंटरनेशनल बाजार में बकरे-बकरियों के मीट के साथ-साथ अब दूध की भी डिमांड बढ़ने लगी है. दूध-मीट की बढ़ती डिमांड के चलते ही तेजी से बकरी पालन बढ़ रहा है. बकरी पालन शुरू करने से पहले लोग इसकी ट्रेनिंग भी ले रहे हैं. जो पहले से बकरी पालन कर रहे हैं और जो शुरुआत कर रहे हैं उनकी भी यही कोशिश होती है कि कैसे बकरे-बकरियों से ज्यादा उत्पादन लिया जाए. कैसे उनकी ग्रोथ हो, और ऐसा क्या खिलाया जाए कि जिससे उनकी खुराक भी पूरी हो और उन्हें बीमारियों से भी बचाया जा सके. खासतौर पर जब मौसम गर्मियों का हो तो ऐसे वक्त में बकरे-बकरियों को हरे चारे वाली खुराक देने के साथ ही उन्हें बीमारियों से भी बचाया जाता है.
केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा सीनियर साइंटिस्ट नीतिका शर्मा का कहना है कि अक्सर बकरे-बकरियों को होने वाली बीमारियां भी उत्पादन नहीं बढ़ने देती हैं. इसलिए खुराक ऐसी होनी चाहिए जिससे ग्रोथ भी हो और बीमारियों से भी बचे रहें. गोट एक्सपर्ट का मानना है कि बकरे-बकरी की पसंद का और पौष्टि़क चारा खिलाने से बकरी पालन की लागत भी कम हो जाती है. साथ ही अलग-अलग तरह का हरा चारा बकरे-बकरियों को कई तरह की बीमारियों से भी बचाता है. लेकिन, हरा चारा हमेशा एक्सपर्ट की सलाह से ही खिलाना चाहिए.
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