Gir Cow: राजस्थान में ऐसे बढ़ाई जा रही है गिर गाय की संख्या, भेड़ संस्थान कर रहा मदद 

Gir Cow: राजस्थान में ऐसे बढ़ाई जा रही है गिर गाय की संख्या, भेड़ संस्थान कर रहा मदद 

Gir Cow अगर देश में गाय-भैंस की बात करें तो गाय में गिर गाय और भैंस में मुर्रा नस्ल की भैंस को खासा उन्नत माना जाता है. गिर गाय गुजरात से तो मुर्रा भैंस हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. राजस्थान के गोपालको को गिर सांड का सीमन दिया जाएगा. मेरठ से सीमन की खेप राजस्थान आएगी. गोपालक भेड़ संस्थान से सीमन के स्ट्रा खरीद सकेंगे. इस तरह आईए तकनीक से गिर गायों का कुनबा बढ़ाया जा सकेगा. 

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 05, 2026,
  • Updated Mar 05, 2026, 12:45 PM IST

डेयरी और पशुपालन में गिर गाय की डिमांड बढ़ रही है. बाजार में गिर के दूध से बने घी के मुंह मांगे दाम मिल रहे हैं. यही वजह है कि सबसे ज्यादा रिसर्च भी गिर गाय को लेकर ही हो रही है. ब्राजील की मदद से एंब्रीयो ट्रांसफर किए जा रहे हैं. गिर गाय की संख्या बढ़ाने के लिए आर्टिफिशल इंसेमीनेशन (एआई) का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. राजस्थान सरकार भी किसानों की इनकम डबल करने के लिए राज्य में गिर गाय की संख्या बढ़ाने पर काम कर रही है. और राज्य सरकार की इस योजना में उसकी मदद कर रहा है केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर, राजस्थान और केंद्रीय गौवंश अनुसन्धान संस्थान, मेरठ, यूपी. 

राज्य सरकार ने इसके लिए दोनों ही बड़े संस्थानों के साथ एक एमओयू भी साइन किया है. साल साल 2020-21 में जारी हुई केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट के आंकड़ों पर जाएं तो देश में इस वक्त प्योर गिर नस्ल की गायों की संख्या 23 लाख से ज्यादा है. जबकि गिर गाय की कुल संख्या 70 लाख के आसपास है. गिर के दूध और दूध से बने घी की डिमांड को देखते हुए ही इसकी संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.  

साथ-साथ मिलेंगी दूध और बछिया

CSWRI के डायरेक्टर अरुण कुमर तोमर ने किसान तक को बताया कि हमारे संस्थान की इस पहल से किसानों को दोहरा फायदा होगा. एक तो यह कि गिर गाय से अच्छा और ज्यादा दूध मिलेगा. बाजार में गिर गाय के दूध से बने घी की भी बहुत डिमांड है. इससे अच्छी इनकम होगी. इतना ही नहीं गिर गाय से मिलने वाली बछिया भी एक खास उम्र की होने पर बाजार में बेची जा सकेगी. आज बाजार में बछिया की भी अच्छी खासी डिमांड है.

राजस्थान में किसे मिलेगा योजना का फायदा

डायरेक्टर अरुण कुमार तोमर ने बताया कि मेरठ से हमारे संस्थान में गिर सांड के सीमन की स्ट्रा आएंगी. हम अपनी लैब में उन्हें अच्छी तरह से स्टोर करेंगे. अभी योजना के शुरुआत में इसका फायदा टोंक जिले के किसानों को मिलेगा. हालांकि टोंक के वो ही किसान इसका फायदा उठा पाएंगे जिनके पास पहले से गिर गाय है. ऐसे किसानों को सीमन की स्ट्रा दी जाएगी. इससे किसान अपने यहां गिर गायों की संख्या बढ़ा सकेंगे. इसके बाद राजस्थान के सभी किसान इस योजना का फायदा उठा सकेंगे. उन्हें गिर गाय को गर्भवती कराने के लिए गिर सांड की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा. साथ ही किसी अन्य नस्ल के सांड की मदद लेने से गिर गाय की नस्ल भी खराब नहीं होगी. इससे नस्ल सुधार में भी मदद मिलेगी. 

देश में गायों की स्थिति पर एक नजर 

  • देश में देसी गायों की 50 से ज्यादा रजिस्टर्ड ब्रीड हैं. 
  • देश में प्योर देसी ब्रीड गायों की संख्या 2.49 करोड़ है. 
  • देश में 41 देसी नस्लीय गायों की कुल संख्या 4.18 करोड़ है.
  • देश में देसी गायों की कुल संख्या 14.21 करोड़ है.  
  • देश में दूध देने वाली देसी गायों की संख्या 3.59 करोड़ है. 
  • देश के कुल दूध उत्पादन में देसी गायों का 20 फीसद हिस्सा है.  
  • साल 2020-21 में देसी गायों का दूध उत्पादन 4.20 करोड़ मीट्रिक टन था. 

5 राज्यों में है गायों की सबसे ज्यादा संख्या 

  1. मध्य प्रदेश- 54.68 लाख 
  2. यूपी- 50 लाख 
  3. बिहार- 44.68
  4. राजस्थान- 42.29 लाख 
  5. पश्चिम बंगाल- 32.52

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