
बाजार में इस वक्त भरपूर भूसा आ रहा है. कई जगह पर भूसे को तूड़ी भी कहा जाता है. क्योंकि अभी गेहूं की कटाई हो रही है और बहुत सारी जगह पर तो पूरी भी हो चुकी है. इसलिए सस्ती होने के चलते भी बहुत सारे पशुपालक नया भूसा खरीद रहे हैं. वहीं कुछ ऐसे भी पशुपालक हैं जिन्होंने अभी गेहूं काटा है तो उनके घर में भरपूर भूसा है. ऐसे पशुपालक पशुओं को खूब भूसा खिला रहे हैं. यही वजह है कि आजकल पशुओं को पेट दर्द, दस्त और दूध उत्पादन होने की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं.
ये सब नए भूसे की वजह से ही हो रहा है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो नया भूसा अपने साथ कुछ बीमारियां भी लाता है. अगर कुछ जरूरी टिप्स अपनाकर नया भूसा पशुओं को नहीं खिलाया गया तो गाय-भैंस हो या फिर भेड़-बकरी उन्हें कई तरह की गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं. इसमे जो सबसे आम बीमारी है वो पाचन संबंधी कब्ज और दस्त लगने की है.
एनिमल एक्सपर्ट डॉ. दिनेश गुलिया का कहना है कि नया भूसा ज्यादा खिलाने पर पशुओं को कई तरह की परेशानी होने लगती हैं. जैसे खाना हजम करने में परेशानी होती है. पेट फूलना और बदहजमी होने लगती है. पशुओं को दस्त हो जाते हैं और पेट में मरोड़ उठने लगते हैं. वहीं सबसे बड़ा नुकसान ये होता है कि पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. पशुपालकों को सलाह ये दी जाती है कि वो कम से कम 15 से 20 दिन पुराना भूसा ही पशुओं को खिलाएं.
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