
गाय-भैंस को गाभिन कराने के लिए अब हाईटेक तरीके आ गए हैं. बावजूद इसके आज भी बहुत सारे पशुपालक हीट में आने पर पशुओं को उन्हीं पुराने, ट्रेडीशनल तौर-तरीको से ही गाभिन कराते हैं. इसमे जो तरीका है उसके मुताबिक जब गाय या भैंस हीट में आती है तो उसे बुल के पास ले जाया जाता है. इस तरीके में ये बहुत मुश्किल होता है कि जिस ब्रीड के गाय-भैंस हैं उसी का बुल मिल जाए. ये भी नहीं पता होता है कि बुल को कौन-कौनसी बीमारियां लगी हुई हैं. यहां तक की बुल के सीमन (वीर्य) की क्वालिटी के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होती है.
लेकिन अब धीरे-धीरे इस पुराने तरीके में बदलाव आ रहा है. हालांकि पुराना तरीका अभी पूरी तरह से बदला नहीं है, लेकिन उसमे कमी आई है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि गाभिन कराने की नई टेक्नोलॉजी से अब एक सांड अपनी जिंदगी में 200 नहीं 20 हजार गायों को गाभिन कर सकता है. इसके चलते लोगों को रोजगार भी मिल रहा है और गाय-भैंसों की संख्या भी बढ़ रही है.
सेंट्रल बफैलो रिसर्च इंस्टीट्यूट, हिसार, हरियाणा के पूर्व सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सज्जन सिंह ने बताया कि औसत एक सांड चार एमएल वीर्य डिस्चार्ज करता है. इतने वीर्य में एआई के लिए 200 डोज तैयार हो जाती हैं. अब यहां असल काम शुरू होता है एआई टेक्नीशियन का. एआई से गर्भाधान का औसत 40 से 50 फीसद है. लेकिन कई टेक्नीशियन ऐसे भी हैं जो 80 फीसद तक रिजल्ट देते हैं. इस तरह एक सांड के चार एमएल वीर्य से 80 से 150 तक गायों को गाभिन किया जा सकता है. एक सांड चार एमएल वीर्य डिस्चार्ज करेगा या छह एमएल तक ये उस सांड की हैल्थ और दूसरी चीजों पर निर्भर करता है.
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