Adulteration in Milk-Curd: एक नामी ब्रांड के दही के बाद अब दूध में मिले मल वाले बैक्टीरिया ई-कोलाई

Adulteration in Milk-Curd: एक नामी ब्रांड के दही के बाद अब दूध में मिले मल वाले बैक्टीरिया ई-कोलाई

Adulteration in Milk-Curd रोजाना इस्तेमाल होने वाले डेयरी प्रोडक्ट कितने सेफ हैं, यहां तक कि जाने-माने ब्रांड के भी, इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. एक स्वतंत्र प्लेटफार्म पर लगातार डेयरी और पोल्ट्री प्रोडक्ट की जांच करा रहा है. जांच में ये खतरनाक खुलासे हो रहे हैं. यहां तक की दूध-दही में मल का बैक्टीरिया ई-कोलाई भी मानक से ज्यादा पाया जा रहा है. 

milking cowmilking cow
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 11, 2026,
  • Updated Feb 11, 2026, 4:40 PM IST

मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर का है. जिसने एक नामी ब्रांड के दूध की लैब में जांच कराई है. जांच में सामने आया है कि दूध के अंदर मानक से ज्यादा मल वाला बैक्टीरिया ई-कोलाई मिला है. ये उसी कंपनी का दूध है जिसका कुछ दिन पहले दही का सैम्पल फेल हुआ था. दही में भी दूसरी चीजों के अलावा बैक्टीरिया ई-कोलाई पाया गया था. जिन कंपनियों के दूध में बैक्टीरिया ई-कोलाई मिला है उसमे गुजरात, दिल्ली के अलावा एक और कंपनी का दूध है जो ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर बिकता है. 

दूध से जुड़ी इस रिपोर्ट को बहुत चौंकाने वाली बताया जा रहा है. ये हाल उन ब्रांड का है जिनके नाम से दूध बिकता है. लेकिन जांच के बाद आई रिपोर्ट ने सभी पर सवालियां निशान लगा दिए हैं. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो दूध में FSSAI की तय लिमिट से 98 गुना ज्यादा बैक्टीरिया ई-कोलाई मिला है. एक्सपर्ट का कहना है कि ये रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि दूध के साथ हाइजीन और क्वालिटी को लेकर समझौता किया गया है. 

300 लीटर से बन रहा 18 सौ लीटर दूध 

राष्ट्रीय स्तर पर फूड सेफ्टी के मानक तय करने और उनका पालन कराने के लिए FSSAI है. राज्यस्तर पर भी एक विभाग होता है. बावजूद इसके रोजमर्रा के खानपान में शामिल दूध-दही को लेकर डराने वाली खबरें आ रही हैं. देश में फूड सेफ्टी पर भी सवाल उठने लगे हैं. क्योंकि ये कोई पहला मामला नहीं है कि डेयरी प्रोडक्ट मानक पूरे नहीं कर रहे हैं. पिछले महीने ही, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में पुलिस और फूड सेफ्टी अफसरों ने मिलावटी दूध बनाने वाली गैर-कानूनी डेयरी यूनिट का खुलासा किया था.

हाल ही में गुजरात में एक रेड में अफसरों का कहना था कि 300 लीटर असली दूध में पानी, मिल्क पाउडर, कॉस्टिक सोडा, तेल, डिटर्जेंट और यूरिया मिलाकर हर दिन लगभग 1800 लीटर मिलावटी दूध बनाया जा रहा था. FSSAI का कहना है कि इस दौरान 1370 लीटर ऐसा दूध मौके पर ही नष्ट किया गया जो मानकों को पूरा नहीं कर रहा था. 

दूध में ऐसे आता है ई-कोलाई बैक्टीरिया 

डेयरी एक्सपर्ट बताते हैं कि ई-कोलाई बैक्टीरिया सीधे इंसानों से नहीं आता है. होता ये है कि हमारे देश में आज भी जिस घर में चार-पांच गाय-भैंस हैं तो वहां हाथ से पशुओं का दूध निकाला जाता है. कई बार पशुओं के बाड़े में गोबर उठाने समेत साफ-सफाई के दूसरे काम करते हुए भी कुछ लोग उन्हीं हाथ से पशुओं का दूध दुहाने बैठ जाते हैं.

और यहीं से बैक्टीरिया दूध में आ जाता है. जबकि बड़ी डेयरियों में पाउच वाले दूध को आमतौर पर हाई टेम्परेचर शॉर्ट टाइम (HTST) पाश्चराइजेशन से गुजारा जाता है. इस दौरान दूध को करीब 15 सेकंड के लिए 72 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाता है, फिर तेज़ी से ठंडा किया जाता है. ऐसे में जो भी बैक्टीरिया दूध में होते हैं तो वो मर जाते हैं और दूध में नहीं आते हैं. 

कोल्ड चेन भी है जिम्मेदार

डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि अगर ट्रांसपोर्ट के दौरान, रिटेल में, या घर पर भी दूध या और किसी डेयरी प्रोडक्ट की कोल्ड चेन टूट जाए तो बचे हुए बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ सकते हैं. इसीलिए पाश्चुराइज़्ड दूध को कभी भी कच्चा नहीं पीना चाहिए. इस्तेमाल करने से पहले दूध को उबालना चाहिए. टेट्रा पैक में बिकने वाला UHT दूध अलग होता है. इसे 135 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा गर्म किया जाता है. इसीलिए टेट्रा पैक हाल के लैब टेस्ट में लगातार पास हुए हैं.

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