
भारत में फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन (FAO) के प्रतिनिधि का कहना है कि भारत में ऊंटनी और बकरियों के दूध में ग्रोथ की बहुत संभावना है. इससे पशुपालकों का रोजगार भी बढ़ेगा. इस सब को देखते हुए हम भारत सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार हैं. एफएओ के भारत में प्रतिनिधि का ऐसे वक्त में बयान आया है जब आनंद, गुजरात में नॉन बोवाइन और फ्यूचर मिल्क को लेकर चर्चा चल रही है. इस सिंपोजियम का आयोजन इंडियन नेशनल कमिटी ऑफ़ इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (INC-IDF) की ओर से किया जा रहा है.
सिंपोजियम में एक्सपर्ट नॉन बोवाइन मिल्क को न्यूट्रिएंट्स से भरपूर, क्लाइमेट-फ्रेंडली, ऑर्गेनिक और फ्री-रेंज सिस्टम से बनने वाले दूध के तौर पर प्रमोट करने की डिमांड कर रहे हैं. इसके पीछे एक्सपर्ट एक और बड़ी वजह बताते हैं कि भेड़, बकरी और ऊंट पालन लो कार्बन सिस्टम वाला सेक्टर है. आज सिंपोजियम का आखिरी दिन है. देश-विदेश से आए एक्सपर्ट नॉन बोवाइन और फ्यूचर मिल्क पर चर्चा कर रहे हैं.
नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने नॉन-बोवाइन और फ्यूचर मिल्क की क्लाइमेट-रेजिलिएंट, न्यूट्रिशन-सपोर्टिंग और अक्सर महिलाओं द्वारा मैनेज किए जाने की बढ़ती इंपॉर्टेंस पर बात की. उन्होंने ऑपरेशन फ्लड के जरिए कमी से आत्मनिर्भरता तक इंडिया के डेयरी सफर के बारे में भी याद दिलाया. इस मौके पर उन्होंने बकरी के आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन और अमूल की सरहद डेयरी के जरिए ऊंटनी के दूध की मार्केटिंग में हुई तरक्की का ज़िक्र किया.
साथ ही ऐसे मॉडल्स को और आगे बढ़ाने की अपील की जिससे किसानों को कंज्यूमर वैल्यू मिल सके. उन्होंने रिसर्च से आगे बढ़कर, सस्टेनेबिलिटी, प्रोसेसिंग, बीमारी मैनेजमेंट और न्यूट्रिशन पर फोकस करते हुए नॉन-बोवाइन दूध की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया.
इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (IDF) द्वारा सिंपोजियम में IDF के प्रेसिडेंट मिस्टर गिल्स फ्रॉमेंट ने खराब क्लाइमेट वाले इलाकों के लिए टिकाऊ पशुपालन में विकल्प के तौर पर बकरी, भेड़ और ऊंट के दूध के रोल पर जोर दिया. उन्होंने छह वरीयता पर बात करते हुए कहा कि प्रायोरिटीज, एनवायरनमेंट, एनिमल वेलफेयर, न्यूट्रिशन, फूड सेफ्टी, हेल्थ और इनक्लूसिविटी बताईं.
साथ ही 100 करोड़ टन से ज्यादा होने के बावजूद ग्लोबल मिल्क प्रोडक्शन में असमान ग्रोथ पर भी ध्यान दिया. साथ ही फूड सेफ्टी, इनोवेशन और मजबूत न्यूट्रिशन डेटा के ज़रिए नॉन-बोवाइन डेयरी को बढ़ाने की अपील की. ग्लोबल स्टैंडर्ड्स में IDF की भूमिका पर जोर देते हुए, उन्होंने ज़्यादा मज़बूत कोलेबोरेशन और क्लाइमेट-रेजिलिएंट प्रैक्टिसेज की अपील की.
एनिमल हसबेंडरी कमिश्नर डॉ. नवीना बी. महेश्वरप्पा ने UN के 2026 इंटरनेशनल ईयर ऑफ ग्रेजिंग लैंड्स एंड पेस्टोरलिस्ट्स के बीच सिंपोजियम की अहमियत पर जोर दिया. भारत के टिकाऊ फ़ूड पैटर्न और अलग-अलग तरह के एनिमल प्रोटीन की बढ़ती डिमांड पर ध्यान दिलाया. उन्होंने नॉन-गोजातीय दूध को न्यूट्रिएंट्स से भरपूर, क्लाइमेट-फ्रेंडली और ऑर्गेनिक, फ्री-रेंज सिस्टम से बनने वाले दूध के तौर पर प्रमोट करने की अपील की है. भेड़, बकरी और ऊंट की वैल्यू चेन को लो कार्बन सिस्टम वाला पशुपालन बताया है.
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