Fish Production: इस साल 220 लाख टन तक हो जाएगा मछली उत्पादन, जानें और क्या बोली सरकार 

Fish Production: इस साल 220 लाख टन तक हो जाएगा मछली उत्पादन, जानें और क्या बोली सरकार 

बीते 10 साल में मछली उत्पादन 95 लाख टन से 197 लाख टन पर पहुंच गया है. सीफूड एक्सपोर्ट भी 62 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का हो रहा है. हालांकि इस आंकड़े में बड़ा नंबर झींगा का है. अमेरिका और चीन झींगा का बड़ा बाजार है. वहीं सरकार का दावा है कि इस साल मछली उत्पादन 20 लाख टन से ज्यादा होगा. सरकार ने फिश प्रोडक्ट पर GST को 12 फीसद से घटाकर 5 फीसद कर दी है. 

Bangladesh produces nearly 70 percent of the world’s hilsa and it is also the country’s national fish.Bangladesh produces nearly 70 percent of the world’s hilsa and it is also the country’s national fish.
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 09, 2026,
  • Updated Feb 09, 2026, 1:34 PM IST

फिशरीज सेक्टर को "सनराइज सेक्टर" भी कहा जाता है. एक्सपर्ट के मुताबिक फिशरीज न्यूट्रीशन सिक्योरिटी, हैल्दी और सस्ता प्रोटीन देने वाला सेक्टर है. इतना ही नहीं ये सेक्टर तीन करोड़ से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार भी देता है. यही वजह है कि आज हमारा देश फिशरीज सेक्टर में मछली उत्पादन करने वालों में दूसरे स्थान पर आ गया है. विश्व के कुल मछली उत्पादन का 8 फीसद उत्पादन हमारे देश में हो रहा है. वहीं भारत सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक भी है. अगर स्त्रोत की बात करें तो हमारे देश में 11 हजार किमी से ज्यादा का कोस्टल एरिया है. 

देश नदियों, जलाशयों, बाढ़ के मैदानों के सबसे बेहतर नेटवर्क का फायदा उठा रहा है. विदेशी मुद्रा आय में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. इसी के चलते देश में मछली उत्पादन 197 लाख टन पर पहुंच गया है. बीते 10 साल में उत्पादन डबल से ज्यादा हुआ है. इसमे सबसे बड़ा योगदान इनलैंड फिशरीज का है. जमीन पर मछली पालन इनलैंड में आता है. इसका योगदान करीब 75 फीसद का है. वहीं केन्द्र सरकार का दावा है कि इस साल ये उत्पादन 220 लाख टन पर पहुंच जाएगा. 

ट्राउट-ठंडे पानी की मछली को मिलेगा बढ़ावा 

मछली उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगातार कई तरह के काम किए जा रहे हैं. खासतौर पर मत्स्य पालन विभाग आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, मार्केट एक्सेस, टेक्नोलॉजी अपनाने, ट्रेसबिलिटी और जलवायु-लचीली मत्स्य पालन प्रणालियों पर फोकस कर रहा है. इसी के तहत सरकार ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, कोल्ड चेन इंटीग्रेशन, प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट यूनिट्स को लिस्ट में शामिल किया है.

साथ ही आधुनिक लैंडिंग और फसल कटाई के बाद का इंफ्रास्ट्रक्चर, नदी रैंचिंग और हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में ट्राउट फार्मिंग और हैचरी नेटवर्क के माध्यम से ठंडे पानी की मत्स्य पालन को बढ़ावा देना शामिल है. सरकार ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, कोल्ड चेन इंटीग्रेशन, प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट यूनिट्स का इस्तेमाल करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 तक राष्ट्रीय मछली उत्पादन को 220 लाख टन तक बढ़ाने का एक लक्ष्य रखा है.

NFDP में रजिस्टर्ड हुए 30 लाख लोग 

मछली पालन विभाग का कहना है कि फिशरीज सेक्टर में मिली कामयाबी के पीछे मुख्य स्तंभ डिजिटल इंटीग्रेशन का अहम रोल रहा है. इस क्षेत्र के बिखरे हुए और अत्यधिक विविध हितधारक आधार को देखते हुए, संस्थागत वित्त और कल्याण सहायता तक निर्बाध पहुंच के लिए एक एकीकृत डिजिटल इकोसिस्टम की जरूरत थी. इससे नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) लॉन्च हुआ, जो एक सिंगल-विंडो डिजिटल आर्किटेक्चर है, जिसमें अब लगभग 30 लाख हितधारक पंजीकृत हैं, जो क्रेडिट, बीमा, सहकारी सेवाओं, बाजारों और प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहनों तक पहुंच को सक्षम बनाता है. 

30 लाख से 10 करोड़ की है जरूरत 

तेजी से विकास के बाद भी फिशरीज सेक्टर जमीनी स्तर पर पूंजी की कमी से जूझ रहा है, जहां निवेश की बहुत जरूरत बहुत अलग-अलग हैं. छोटे पैमाने के मत्स्य पालन और छोटे उद्यमों को आमतौर पर 50 हजार रुपये  से 30 लाख रुपये तक की क्रेडिट सहायता की जरूरत होती है. जबकि बड़े और ज्यादा पूंजी वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोसेसिंग परियोजनाओं के लिए 10 करोड़ या उससे अधिक की फंडिंग की जरूरत हो सकती है.

इस वित्तीय असमानता को पहचानते हुए, विभाग ने व्यवस्थित रूप से बैंकों के साथ मिलकर अनुकूलित, गतिविधि-आधारित ऋण उत्पादों को डिजाइन किया है, जिससे हितधारकों को कार्यशील पूंजी और संपत्ति निर्माण दोनों के लिए संरचित संस्थागत क्रेडिट तक पहुंचने में मदद मिलती है.

केसीसी ने दिया मछली पालकों को बूस्टअप

मछली पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जिसे 2018-19 में पेश किया गया था, अल्पकालिक परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सबसे सुलभ साधन के रूप में उभरा है. जून 2025 तक 4.76 लाख KCC जारी किए जा चुके हैं, जिसमें 3214 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं. PM-MKSSY कंपोनेंट 1A के तहत, डॉक्यूमेंटेशन और प्रोसेसिंग खर्चों को पूरा करने के लिए उधार लेने वालों को "सक्सेस फीस" के तौर पर 5 हजार रुपये तक का एक बार का पोस्ट-डिस्बर्समेंट इंसेंटिव भी दिया जाता है.

लोन प्रोसेस को NFDP के ज़रिए पूरी तरह से डिजिटाइज़ कर दिया गया है, जिसमें अब 12 राष्ट्रीयकृत बैंक शामिल हो गए हैं. जिससे आवेदक मोबाइल या कंप्यूटर के ज़रिए दूर से ही लोन रिक्वेस्ट सबमिट कर सकते हैं. एक्टिविटी का प्रकार, अवधि और लोन का मकसद चुन सकते हैं. रियल टाइम में स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं. 

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