Cow Disease: गाय का दूध उत्पादन घटा देती हैं ये बीमारियां, घर पर ही ऐसे करें इलाज 

Cow Disease: गाय का दूध उत्पादन घटा देती हैं ये बीमारियां, घर पर ही ऐसे करें इलाज 

Cow Disease दुधारू पशु गाय-भैंस हो या भेड़-बकरी, छोटी-छोटी बीमारियों में बरती गई लापरवाही सभी के लिए परेशानी की वजह बन जाती है. कुछ आम और छोटी-छोटी बीमारी ऐसी होती हैं जिनका इलाज घर पर ही किया जा सकता है. गायों में होने वाली कुछ ऐसी ही आम बीमारियों और उपायों के बारे में इस खबर पर बात हो रही है. 

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 17, 2026,
  • Updated Jun 17, 2026, 2:44 PM IST

पशुपालन में अक्सर छोटी-छोटी बीमारियां बड़ी बीमारी बन जाती हैं. और इसकी सबसे बड़ी वजह होती है पशुपालक की लापरवाही. होता ये है कि जब पशुओं को कोई छोटी बीमारी होती है तो उस पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं. कई बार तो इलाज में भी लापरवाही बरती जाती है. जबकि ये उस तरह की बीमारी होती हैं कि जिनका इलाज घर पर ही घरेलू साधनों से किया जा सकता है. गायों में भी कुछ ऐसी ही बीमारियां होती हैं. ये वो छोटी बीमारियां हैं जो अनुभव के आधार पर सही की जा सकती हैं. 

लेकिन इन्हीं के चलते गाय का दूध उत्पादन घटने लगता है. वहीं गाय को होने वाली आम बीमारियां पशुपालक की लागत को भी बढ़ा देती हैं. क्योंकि गाय की मामूली सी बीमारी का असर भी उसके दूध उत्पादन पर पड़ता है, लेकिन गाय चारा यानि अपनी खुराक उतनी ही खाती है. इसके लिए भी एक्सपर्ट घरेलू उपायों को अपनाने पर जोर देते हैं. और अच्छी बात ये भी है कि इन उपायों पर खर्चा भी ना के बराबर ही आता है.

जूं और किलनी का होना

गाय के जूं और किलनी होने के दौरान नीम के पत्तों को पानी में उबालकर गाय के शरीर पर स्प्रे करें. या फिर एक कपड़े को नीम के पानी में डालकर कपड़े से पशु को धोना चाहिए. इस उपाय को कई दिन लगातार करने से गाय की जूं और किलनी की परेशानी दूर हो जाती है. 

जेर का ना निकलना

गाय के प्रसव के बाद जेर पांच घंटे में गिर जानी चाहिए. अगर ऐसा न हो तो गाय दूध भी नहीं देती. अगर ऐसा हो तो फौरन ही पशुओं के डॉक्ट र से सलाह लेकर जेर से जुड़े उपाय अपनाने चाहिए. इसके साथ ही पशु के पिछले भाग को गर्म पानी से धोना चाहिए. और ख्यासल रहे कि किसी भी हाल में जेर को ना तो हाथ लगाएं और ना ही जेर को खींचने की कोशिश करनी चाहिए.

चोट या घाव में कीड़े 

चोट या घाव में कीड़े पड़ने से कोई भी पशु बहुत ज्याहदा परेशानी महसूस करता है. जब भी पशु के शरीर पर कोई भी चोट या घाव देखें तो फौरन ही उसकी गर्म पानी में फिनाइल या पोटाश डालकर सफाई करनी चाहिए. घाव में अगर कीड़े हों तो एक पट्टी को तारपीन के तेल में भिगोकर पशु के उस हिस्सेट पर बांध देनी चाहिए. मुंह के घावों को हमेशा फिटकरी के पानी से धोना चाहिए. लेकिन साथ ही साथ घाव से जुड़े उपाय जानने के लिए डॉक्टार से से संपर्क जरूर करना चाहिए.

योनि का इंफेक्शन

योनि में इंफेक्श न तब बनता है जब बच्चाु देने के बाद गाय की जेर आधी शरीर के अंदर और आधी बाहर लटक जाती है. ऐसा होनेपर गाय के शरीर का तापमान बढ़ जाता है और योनि मार्ग से बदबू आने लगती है. इसके साथ ही पशु की योनि से तरल पदार्थ रिसने लगता है. इस स्थिति में पशु चिकित्सक की निगरानी में गाय के उस हिस्सेस को गुनगुने पानी में डिटॉल और पोटाश मिलाकर साफ करना चाहिए. 

दस्त और मरोड़

गाय को दस्तफ और मरोड़ होने पर वो पतला गोबर करने लगती है. डॉक्टिरों का कहना है कि किसी भी पशु को इस तरह की परेशानी तब होती है जब पशु के पेट में ठंड लग जाए. अगर ऐसा होता है तो इस दौरान गाय को हल्का आहार देना चाहिए जैसे चावल का माड़, उबला हुआ दूध, बेल का गुदा आदि. वहीं साथ ही बछड़े या बछड़ी को दूध कम पिलाना चाहिए.

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