
एक वक्त था जब बकरी को गरीब की गाय कहा जाता था. बकरी पालन को बहुत ही खराब नजर से देखा जाता था. यही वजह थी कि पैसे से संपन्न लोग बकरी पालन करने से बचते थे. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. वजह जो भी हो, लेकिन आज गाय से ज्यादा बकरी पालन बढ़ रहा है. बकरी पालन के बड़े-बड़े फार्म खुल रहे हैं. डिफेंस, सिविल सर्विस समेत बड़ी-बड़ी नौकरियां छोड़कर या रिटायर होकर लोग बकरी पालन से जुड़ रहे हैं. केन्द्र सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बड़ी योजना चला रही है.
इस योजना का नाम नेशनल लाइव स्टॉक मिशन है. इसके पशुपालकों सब्सिडी दी जाती है. इस योजना के आंकड़े बताते हैं कि गाय से ज्यादा लोग बकरी पालन के लिए लोन मांग रहे हैं. पीएम नरेन्द्र मोदी भी अपने भाषणों में कहते हैं कि किसानों को गाय-भैंस के अलावा बकरी पालन के बारे में भी सोचना चाहिए. इस योजना का मकसद है किसानों की इनकम दोगुनी करने का है.
डॉ. इन्द्रजीत सिंह, वीसी, बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (बासु), पटना, बिहार का कहना है कि बीटल नस्ल की बकरी हर रोज पांच लीटर तक दूध देती है. जबकि देसी गाय के दूध का एवरेज 2.5 लीटर प्रति दिन है. गाय को रोजाना सात से आठ किलो सूखा चारा चाहिए, जबकि बकरी के लिए दिनभर में ज्यादा से ज्यादा दो किलो हरा चारा बहुत हो जाता है. बीटल बकरी साल में दो बार बच्चे देती है. एक बार में बकरी दो से तीन बच्चे तक देती है. जबकि गाय बकरी के इस मुकाबले में कहीं नहीं ठहरती है.
बीटल के अलावा बकरियों की और भी कई ऐसी नस्ल हैं जो सालभर में दो बार दो से तीन बच्चे तक देती हैं. अगर कोई बीटल बकरी को दूध का कारोबार करने के लिहाज से पालता है तो वो भी अच्छी कमाई कर सकता है. क्योंकि आज बकरी के दूध की डिमांड को देखते हुए उसकी कोई एक कीमत तय नहीं है. जो पंजाब बकरी पालने में शर्म महसूस करता था आज उसी पंजाब में बकरियों के 150 से ज्यादा बड़े फार्म हैं. ज्यादातर लोग बकरी के दूध का कारोबार कर रहे हैं.
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