Green Fodder Silage: बरसात के दिनों में हरे चारे संग इसलिए जरूरी है सूखा चारा और मिनरल्स 

Green Fodder Silage: बरसात के दिनों में हरे चारे संग इसलिए जरूरी है सूखा चारा और मिनरल्स 

Green Fodder Silage बरसात के दिनों में सीधे खि‍लाए गए हरे चारे से दूध की क्वालिटी भी खराब होने लगती है. खासतौर पर अगर हरा चारा खिला भी रहे हैं तो इस दौरान पशु को सूखे चारे और मिनरल्स की कमी न होने दें. मॉनसून में उगे हरे चारे को साइलेज बनाकर भी आने वाले मौसम के लिए रखा जा सकता है. 

पशुओं को खिलाएं ये हरा चारापशुओं को खिलाएं ये हरा चारा
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 09, 2026,
  • Updated Jul 09, 2026, 1:07 PM IST

बरसात के दिनों में जहां देखों वहीं हरियाली नजर आती है. और इसी हरियाली में होता है पशुओं के लिए हरा चारा. पशु ही नहीं पशुपालक भी इसे देखकर खुश होते हैं कि चलो अब कुछ दिन पशुओं को भरपूर हरा चारा मिलेगा. लेकिन फोडर एक्सपर्ट की मानें तो इस मौसम का हरा चारा सीधे तौर पर पशुओं को खि‍लाना बहुत नुकसानदायक होता है. इस चारे से जहां पशुओं का पेट खराब होता है, वहीं चारे में संक्रमण फैलाने वाले बरसाती जीवाणु भी होते हैं. इसलिए हरे चारे को थोड़ा सुखाकर खि‍लाने की सलाह दी जाती है. लेकिन बरसात के दिनों में धूप भी कम ही निकलती है. यही वजह है कि एक्सपर्ट इन दिनों पशुओं को कम हरा चारा खि‍लाने की सलाह देते हैं. 

वहीं जो खिलाया जा रहा है उसमे भी सूखा चारा और मिनरल्स मिलाने की सलाह दी जाती है. साथ ही ऐसे वक्त में पहले से स्टोर किए गए हरे चारे जैसे साइलेज खि‍लाने की बात कही जाती है. एक्सपर्ट की मानें तो बरसीम, ओट और चरी पतले तने वाली चारे की फसल हैं. इन्हें आसानी से सुखाकर स्टोर किया जा सकता है. लेकिन किसी भी चारे की फसल को स्टोर करते वक्त इस बात का भी खास ख्याल रखें कि स्टोर किए जा रहे चारे की मात्रा उतनी ही हो कि चारे की आने वाली नई फसल तक स्टोर किया गया चारा खत्म हो जाए.  

जरूरी है सूखा चारा और मिनरल्स  

डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि मॉनसून के दौरान उगे हरे चारे में नमी की मात्रा काफी होती है. पशु जब इस दौरान हरा चारा ज्यादा खाता है तो उसे डायरिया समेत और भी दूसरी बीमारी होने का खतरा बना रहता है. इतना ही नहीं उस चारे में मौजूद नमी के चलते ही दूध की क्वालिटी पर भी असर आ जाता है. इसलिए ये बेहद जरूरी है कि जब हमारा पशु हरा चारा खा रहा हो या बाहर चरने के लिए जा रहा हो तो हम पहले उसे सूखा चारा और मिनरल्स  जरूर दें.

सूखा चारा खूब खिलाने से हरे चारे में मौजूद नमी का स्तर सामान्य हो जाता है. वहीं मिनरल्स की पूरी मात्रा देने से दूध में फैट और दूसरी चीजों का स्तर भी बढ़ जाता है और दूध की क्वा‍लिटी खराब नहीं होती है. एनीमल एक्सपर्ट की मानें तो पशु को सूखे चारे के तौर पर कई तरह का भूसा दिया जा सकता. वहीं मिनरल्स में खल, बिनौले, चने की चूनी आदि दी जा सकती है.  

मॉनसून में ऐसे खिलाएं हरा चारा   

फोडर साइंटिस्ट का कहना है कि हरा चारा स्टोर करने के लिए हमेशा पतले तने वाली फसल का चुनाव करें. क्योंकि पतले तने वाली फसल जल्दी सूखेगी. कई बार ज्यादा लम्बे वक्त तक सुखाने के चलते भी चारे में फंगस की शिकायत आने लगती है.जिस चारे को स्टोर करना है उसे पकने से कुछ दिन पहले ही काट लें. इसके बाद उसे धूप में सुखाने रख दें. लेकिन चारे को सुखाने के लिए कभी भी उसे जमीन पर डालकर न सुखाएं.

चारा सुखाने के लिए जमीन से कुछ ऊंचाई पर जाली वगैरह रखकर उसके ऊपर चारे को डाल दें. इसे लटका कर भी सुखाया जा सकता है. क्योंकि जमीन पर डालने से चारे पर मिट्टी लगने का खतरा रहेगा जो फंगस आदि की वजह बन सकती है.

जब चारे में 15 से 18 फीसद के आसपास नमी रह जाए, यानि चारे का तना टूटने लगे तो उसे सूखी जगह पर रख दें. इस बात का ख्याल रहे कि अगर चारे में नमी ज्यादा रह गई तो उसमे फंगस आदि लग जाएंगे और चारा खराब हो जाएगा. इतना ही नहीं इस खराब चारे को गलती से भी पशु ने खा लिया तो वो बीमार हो जाएगा.  

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