
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के डेयरी किसानों के लिए दूध खरीद मूल्य में एक और बढ़ोतरी का ऐलान किया है. अब आविन (Aavin) के लिए दूध खरीद मूल्य 41 रुपये से बढ़ाकर 44 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि इस फैसले से पशु चारा और रखरखाव की लगातार बढ़ती लागत से जूझ रहे लाखों दुग्ध उत्पादकों को राहत मिलेगी. दूध खरीद मूल्य में यह हाल के दिनों में दूसरी बढ़ोतरी है. इससे पहले मुख्यमंत्री ने 19 अगस्त को विधानसभा में खरीद मूल्य 38 रुपये से बढ़ाकर 41 रुपये प्रति लीटर करने की घोषणा की थी.
नई बढ़ोतरी के बाद अगस्त में ही किसानों को मिलने वाला खरीद मूल्य कुल 6 रुपये प्रति लीटर बढ़ गया है. राज्य सरकार को इस फैसले पर हर महीने करीब 60 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना होगा, जबकि सालाना वित्तीय बोझ लगभग 720 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.
सरकार का मानना है कि दूध उत्पादकों की आय बढ़ने से केवल किसानों को ही राहत नहीं मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. बढ़ती इनपुट लागत के बीच पशुपालन को लाभकारी बनाए रखने और किसानों की चिंताओं को कम करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है.
मुख्यमंत्री विजय ने डेयरी क्षेत्र के फैसले के साथ राज्य में बड़े बुनियादी ढांचा निवेश की भी घोषणा की. तमिलनाडु ट्रांसमिशन इम्प्रूवमेंट स्कीम के लिए 33,066 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं. इस योजना के तहत 196 नए सबस्टेशन बनाए जाएंगे और करीब 15,000 किलोमीटर बिजली लाइन बिछाई जाएगी, जिससे राज्य के बिजली नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
राज्य सरकार ने तूतीकोरिन में 1,600 मेगावाट क्षमता का सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन स्थापित करने की योजना भी घोषित की है. पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत बनने वाली इस परियोजना में करीब 20,800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. वहीं, चेन्नई के बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत करने और शहरी बाढ़ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए 1,762 करोड़ रुपये के अपग्रेड की घोषणा की गई है.
कांचीपुरम जिले के मदुरमंगलम में 175 करोड़ रुपये की लागत से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पार्क स्थापित किया जाएगा. कोयंबटूर में 400 करोड़ रुपये का फिनटेक हब विकसित करने की भी योजना है. इसके अलावा तिरुचिरापल्ली क्षेत्र में मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब बनाने की घोषणा की गई है, जिससे औद्योगिक सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य है.