Goat Lamb Care: मौसमी बीमारी-संक्रमण से बचाने को बकरी के बच्चों की ऐसे करें देखभाल 

Goat Lamb Care: मौसमी बीमारी-संक्रमण से बचाने को बकरी के बच्चों की ऐसे करें देखभाल 

Goat Lamb Care क्योंकि खासतौर पर मीट के लिए छह-छह महीने की उम्र वाले बच्चों के अच्छे दाम मिलना शुरू हो जाते हैं. वहीं एक साल का होने पर बच्चे देने के साथ ही दूध के लिए तैयार हो जाते हैं. बकरी पालन में बच्चों की देखभाल से जुड़े कुछ ऐसे ही टिप्स हम आपको इस खबर में बताने जा रहे हैं. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Aug 27, 2026,
  • Updated Aug 27, 2026, 12:07 PM IST

मौसम कोई भी हो, लेकिन जन्म के साथ ही बकरी के बच्चों के लिए परेशानी खड़ी हो जाती है. सबसे पहले तो निमोनिया अपनी चपेट में लेता है. अगर निमोनिया से बचे तो संक्रमण के अटैक का खतरा बना रहता है. क्योंकि भेड़-बकरियों में री-प्रोडक्शन यानि प्रजनन को बड़े मुनाफे के तौर पर देखा जाता है तो बच्चों की देखभाल फिर बहुत मायने रखती है. यही वजह है कि गोट एक्सपर्ट जन्म से पहले और जन्म के बाद बकरी और उसके बच्चों की देखभाल बहुत जरूरी बताते हैं. इसके लिए एक्सपर्ट की ओर से टिप्स भी दिए जाते हैं. उत्पादन करने वाला पशु गाय-भैंस हो या भेड़-बकरी, सभी का अर्थशास्त्र बच्चा देने पर ही टिका होता है. 

इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि बच्चों की मृत्यु दर को रोका जाए या फिर कम किया जाए. क्योंकि बकरी पालन मीट और दूध दोनों के लिए किया जाता है. इसलिए दोनों में ही मुनाफे के लिए ये जरूरी है कि बकरी साल में दो बार जो दो-दो बच्चे देती है वो जिंदा रहें. अगर एक्सपर्ट की बताई गईं छोटी-छोटी बातों पर काम करके जन्म लेने वाले बच्चों की मृत्यु दर को कम किया जा सकता है.

बाड़े में ऐसे करें बच्चों की देखभाल

गोट एक्सपर्ट  का कहना है कि बकरी के बच्चों की मृत्यु् दर कम करने के लिए ये जरूरी है कि हम उसकी देखभाल के साथ ही उसके खानपान का भी ध्यान रखें. उम्र के साथ उसका वैक्सीनेशन भी कराएं. 

  • बच्चे के पैदा होते ही उसे मां का दूध पिलाएं.
  • बच्चे के वजन के हिसाब से ही उसे दूध पिलाएं. 
  • वजन एक किलो हो तो 100-125 ग्राम दूध पिलाएं. 
  • बच्चे को दिनभर में तीन से चार बार में दूध पिलाएं. 
  • दूध पिलाने के लिए बकरी की जैर गिरने का इंतजार ना करें.
  • बच्चा 18 से 20 दिन का हो तो चारे की कोपल खि‍लाएं. 
  • बच्चा एक महीने का हो जाए तो पिसा हुआ दाना खि‍लाएं. 

देखभाल में इन बातों को करें शामिल 

अगर आप साइंटीफिक तरीके से बकरी पालन कर रहे हैं तो फिर बकरी अपने शेड में अक्टूबर-नवंबर में बच्चा देगी या फिर मार्च-अप्रैल में. ये मौसम का वो वक्त है जब ना तो ज्यादा गर्मी होती है और ना ही ज्यादा सर्दी. बावजूद इसके बकरी के बच्चे को उचित देखभाल की जरूरत होती है. 

  • बच्चे को मौसम से बचाने के लिए जरूरी उपाय पहले से ही कर लें. 
  • जमीन पर बिछावन के लिए पुआल का इस्तेमाल करें.
  • तीन महीने का होने पर बच्चे का टीकाकरण शुरू करा दें.
  • डॉक्टर की सलाह पर पेट के कीड़ों की दवाई दें.
  • जन्म से एक-डेढ़ महीने पहले बकरी की खुराक बढ़ा दें. 
  • बकरी को भरपूर मात्रा में हरा, सूखा चारा और दाना खाने को दें.

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