
कई बार जूनोटिक बीमारियां जानलेवा साबित हो जाती है. कोरोना भी एक जूनोटिक बीमारी है. इसके अलावा और भी ऐसी बहुत सी बीमरी हैं जो जूनोटिक की कैटेगिरी में आती हैं. और अक्सर जूनोटिक बीमारियां पशु-पक्षियों की वजह से होती हैं. ऐसा भी नहीं है कि सड़क और गली में घूमने वाले पशु ही जूनोटिक बीमारियां के लिए जिम्मेदार होते हैं. घर के अंदर पाले जाने वाले पशु और पक्षियों की वजह से भी जूनोटिक बीमारियां होती हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो 70 से ज्यादा ऐसी बीमारियां हैं जो पशु-पक्षियों से इंसानों को होती है.
एक आंकड़ा बताता है कि हर साल करोड़ों लोगों इसकी चपेट में आते हैं और लाखों लोगों की इससे मौत हो जाती है. इसलिए पशु-पक्षी पालने के दौरान किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए इस सब के बारे में स्कूली बच्चों को जागरुक करने की बात चल रही है. इसके लिए स्कूलों में जाकर जागरुकता अभियान चलाए जाएंगे.
हाल ही में बरेली में बच्चों के बीच जूनोटिक पर आधारित प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया था. इस मौके पर बच्चों से जूनोटिक से जुड़े सवाल-जवाब किए गए. इस दौरान केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर बरेली में भी जागरुकता अभियान चलाया गया था. जूनोटिक को आम भाषा में पशुजनित रोग भी बोलते हैं. इस तरह की बीमारियां जीवाणु, विषाणु, कवक, परजीवी, रिकेट्सिया और क्लैमाइडिया के कारण होती हैं.
संक्रमित पशु के साथ सीधे संपर्क से, एयरोसोल, छोटी बूंद के संक्रमण के माध्यम से, शरीर से निकलने वाली लार, रक्त या फिर संक्रमित पशु के शरीर से निकलने वाला कोई दूसरा द्रव, जानवर के काटने से. वहीं वैक्टर, दूषित भोजन, पानी और वायु-जनित या फोमाइट-जनित संचरण के माध्यम से इस तरह की बीमारी होती है.
नेशनल और स्टेदट लेवल पर महामारी की जांच को संयुक्त टीम बनेगी. महामारी फैलने पर संयुक्तं टीम रेस्पांस करेगी.
नेशनल लाइव स्टॉक मिशन की तरह से सभी पशुओं के रोग की निगरानी का सिस्टम तैयार किया जाएगा.
मिशन के रेग्यूलेटरी सिस्टम को मजबूत बनाने पर काम होगा. जैसे नंदी ऑनलाइन पोर्टल और फील्ड परीक्षण दिशा निर्देश हैं.
महामारी फैलने से पहले लोगों को उसके बारे में चेतावनी देने के लिए सिस्टम बनाने पर काम होगा.
नेशनल डिजास्टर मैंनेजमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर जल्द से जल्द महामारी की गंभीरता को कम करना.
प्राथमिक रोगों के टीके और उसका इलाज विकसित करने के लिए तय अनुसंधान कर उसे तैयार करना.
रोग का पता लगाने के तय समय और संवेदनशीलता में सुधार के लिए जीनोमिक और पर्यावरण निगरानी फार्मूले तैयार करना जैसे काम होंगे.
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