पश्चिम बंगाल चुनाव: मोयना के मछली किसानों की अनसुनी मांगें, कब मिलेगी राहत?

पश्चिम बंगाल चुनाव: मोयना के मछली किसानों की अनसुनी मांगें, कब मिलेगी राहत?

पश्चिम बंगाल के मोयना में मछली किसानों की समस्याएं चुनावी मुद्दा बन रही हैं। किसान ताजे पानी, बिजली सब्सिडी, कर्ज और लैब जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, जो वर्षों से अधूरी हैं.

Moyna fish farmersMoyna fish farmers
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Mar 30, 2026,
  • Updated Mar 30, 2026, 12:45 PM IST

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल जोरों पर है. यहां राजनीतिक पार्टियां मछली खाने को लेकर तरह-तरह की बातें और दावे कर रही हैं. मगर पूर्वी मेदिनीपुर जिले के मोयना इलाके में मछली पालन से जुड़े किसान अभी इसी सोच में डूबे हैं कि क्या यह चुनाव उनकी लंबे समय से अटकी मांगों को पूरा कर पाएगा? इन मांगों में नदी से ताजे पानी की उपलब्धता, एक हाई-टेक प्रयोगशाला, बिजली के बिल में सब्सिडी और अन्य चीजें शामिल हैं. चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन मोयना के मछली पालकों की समस्याएं कई दशकों से जस की तस बनी हुई हैं. 

मोयना मत्स्य किसान कल्याण संघ के सचिव पिंटू दास बताते हैं कि मोयना की पूरी अर्थव्यवस्था ही मछली उत्पादन पर टिकी है, फिर भी इस काम के लिए अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है. मछली पालकों का कहना है कि अब तक चाहे कोई भी सरकार सत्ता में आई हो, किसी ने भी मछली किसानों के बारे में नहीं सोचा. और वे अपना मछली पालन का काम पूरी तरह से खुद के ही इंतजामों से चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि यहां के किसानों को न तो बैंक से कर्ज मिलता है, न कोई राजनीतिक मदद, और न ही नदी से ताजा पानी.

मोयना से 70% मछली आपूर्ति

"मोयना भारत का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक क्षेत्र बना हुआ है. असल में, पश्चिम बंगाल में मछली की 70% आपूर्ति यहीं से होती है. यहां 15,000 हेक्टेयर जमीन पर मछली पालन किया जाता है, और हर दिन 500 ट्रक मछली लेकर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, झारखंड और बिहार जाते हैं. मोयना की पूरी अर्थव्यवस्था मछली उत्पादन पर ही टिकी है, फिर भी हमें इस काम के लिए अब तक सरकार से कोई मदद नहीं मिली है," पिंटू दास ने कहा. "हमें कई बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जो हमारी तरक्की में रुकावट डाल रही हैं," उन्होंने आगे कहा.

दास ने विस्तार से बताया कि मछली पालन के लिए उन्हें नदी से ताजे पानी की जरूरत होती है, लेकिन अभी किसान पूरी तरह से अपने ही संसाधनों पर निर्भर हैं और अपने कारोबार के लिए बैंक से कर्ज नहीं ले पा रहे हैं.

सरकार से नाराज मछलीपालक

"मछली पालन के लिए हमें नदी से ताजे पानी की जरूरत है, जो हमें अभी नहीं मिल रहा है. मछली ले जाते समय हमें परेशान किया जाता है और अक्सर पुलिस को रिश्वत देनी पड़ती है. अभी मोयना में 4,000 से 5,000 मछली किसान पूरी तरह से अपने ही संसाधनों पर निर्भर हैं और अपने कारोबार के लिए बैंक से कर्ज नहीं ले पा रहे हैं," उन्होंने कहा.

बिजली के बिल पर सब्सिडी की मांग करते हुए, दास ने कहा कि मछली पालन के लिए बिजली की लगातार आपूर्ति जरूरी है और आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्य किसानों को बिजली पर सब्सिडी देते हैं. एसोसिएशन के सचिव ने आगे बताया कि इस क्षेत्र को तुरंत एक 'फीड लैब' की जरूरत है, ताकि मछली पालन में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और चारे की क्वालिटी सुनिश्चित की जा सके.

"हमें उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल में जिस भी पार्टी की सरकार बनेगी, वह आखिरकार मोयना और हमारे साथी मछली किसानों के बारे में सोचेगी. अगर ये सुविधाएं—ताजा पानी, बिजली पर सब्सिडी, कर्ज और लैब—मिल जाएं, तो मोयना में मछली का उत्पादन काफी बढ़ जाएगा. सही मदद मिलने पर, हमें पूरा भरोसा है कि हम इस क्षेत्र को पूरे देश में मछली उत्पादन में पहले नंबर पर पहुंचा सकते हैं," दास ने कहा.

मछलीपालकों की अनदेखी का आरोप

एक मछली किसान, सुखदेव बैचार ने कहा कि अब तक जिस भी पार्टी की सरकार बनी हो, किसी ने भी मछली किसानों के बारे में नहीं सोचा है. "अब तक जिस भी पार्टी की सरकार बनी हो, किसी ने भी हम मछली किसानों के बारे में नहीं सोचा है, और हम अपना मछली पालन का काम पूरी तरह से अपने ही इंतजामों से चला रहे हैं," 

"यहां के किसानों को न तो बैंक से लोन मिलता है, न ही कोई राजनीतिक समर्थन, और हमें नदी से साफ पानी भी नहीं मिलता. हम ऐसी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं. हमारी मांग है कि हमें नदी का साफ पानी मिले और खेती के लिए बेहतर माहौल मिले. अभी तो टेक्नीशियन भी हमारी मदद नहीं करते. मछली के लिए असरदार दवा देने के बजाय, वे घटिया क्वालिटी के, बेकार प्रोडक्ट सप्लाई करते हैं," बैचार ने कहा.

हाल ही में, बीरभूम में एक रैली को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि वे (BJP का जिक्र करते हुए) आपको मछली खाने नहीं देंगे. आप न तो मीट खा सकते हैं, न अंडे, और न ही बंगाली में बात कर सकते हैं. अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपको 'बांग्लादेशी' का ठप्पा लगा दिया जाएगा. इस कथित नैरेटिव का जवाब देने के लिए, बिधाननगर से BJP उम्मीदवार, डॉ. शरदवत मुखर्जी, अपने चुनावी प्रचार के दौरान हाथ में एक 'कतला' मछली लिए हुए थे.(ANI)

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