
दूध-मीट और अंडा ये सब एनिमल प्रोडक्ट कहलाते हैं. अगर दूध को छोड़ दें तो मीट और अंडे में मिलावट की कोई गुंजाइश नहीं होती है. लेकिन अब इस तरह के प्रोडक्ट में पेस्टीसाइड और एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) का खतरा डराने लगा है. यही वजह है कि एनिमल प्रोडक्ट में मिलावट और ऑर्गेनिक के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही है. दूध और दूध से बने प्रोडक्ट में तो ए1 और ए2 के नाम पर भी एक अलग तरह का ही स्कैम चल रहा है. जिस घी का आधार फैट होता है उसे प्रोटीन से भरपूर ए1 दूध के नाम से ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है.
जिसके चलते पशुपालकों का मुनाफा कम होता जा रहा है. डेयरी प्रोडक्ट को बेचना मुश्किल हो गया है. डेयरी और एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक इस परेशानी को दूर कर मुनाफा बढ़ाया जा सकता है. लेकिन, इसके लिए डेयरी, पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर में आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (एआई) को अपनाना होगा. एआई की मदद से ही एनिमल प्रोडक्ट का उत्पादन करना होगा.
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