
गेहूं की फसल कटने का वक्त नजदीक आ रहा है. फसल कटने के साथ ही नया गेहूं बाजार में आ जाएगा. नए गेहूं के साथ-साथ नया भूसा (तूड़ी) भी आने लगेगा. बहुत सारे पशुपालक ऐसे होते हैं जो हर रोज या दो दिन बाद भूसा खरीदकर गाय-भैंस को खिलाते हैं. लेकिन, एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक भूसा खिलाने का ये तरीका सही नहीं है. क्योंकि बाजार में जब नया भूसा आता है तो वो अपने साथ कुछ बीमारियां भी लेकर आता है. इसलिए ये जरूरी है कि पशुओं को नया भूसा खिलाने से पहले एक्सपर्ट के बताए कुछ टिप्स को जान लें.
क्योंकि नया भूसा पशुओं को लगातार खिलाया जाता है तो उन्हें पाचन संबंधी कब्ज या बंधा होना या दस्त लगने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक सर्दी-गर्मी हो या बरसात, हर मौसम में पशुओं के चारे के बारे में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए. जैसे बरसात के दौरान पशुओं को ज्यादा हरा चारा नहीं खिलाया जाता है उसी तरह से पशुओं को नया भूसा भी एक साथ बड़ी मात्रा में नहीं दिया जाना चाहिए. उसे देने का एक तरीका है, जिसके बारे में यहां बात की जा रही है.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं का पेट चार हिस्सों में बंटा होता है. जो रूमन, रेटिकुलम, ओमेंसम और अबोमेसम नाम से जाने जाते हैं. खास बात ये है कि जुगाली करने वाले पशुओं में चारे का पाचन सूक्ष्म जीवों द्वारा फर्मेटेड किया जाता हैं. आहार में एकदम बदलाव करने से सूक्ष्म जीवो का रूमन में संतुलन बिगड़ जाता हैं और इसके चलते पशुओ में पाचन संबंधी परेशानियां होने लगती हैं.
रोज 20 ग्राम प्रति 100 किलो शरीर के वजन के अनुसार खिलाने से पशुओं की कब्ज सही हो जाती है.
अफारा हो तो 200 एमएल अरंडी के तेल को गरम पानी के साथ अच्छे से मिला कर पशुओं को हर चार से छह घंटों के अंतराल पर पिला सकते हैं.
पशुओ को दस्त लगने की स्थिति मे नीम, अनार, अमरूद के पत्तो, सूखी अधरक व गुड़ के साथ दे सकते हैं.
कोई भी ज़हरीली दवा (कीटनाश्क स्प्रे) आदि भूसा के साथ स्टोर में न रखें.
मशीनों के चलते गेंहू कटाई के दौरान भूसा में सूल, मिट्टी की मात्रा आने से छानना जरूरी है.
गर्मियों के दौरान पशुओं को खुराक दिन के ठंडे समय में यानि सुबह-शाम में ही दें.
भैंस का रंग काला और पसीने की सीमित ग्रंथियां होने से गर्मी का तनाव उन्हें ज्यादा होता है. इसलिए दिन में दो-तीन बार जरूर नहलाएं.
संभव हो तो 24 घंटे साफ और ठंडा पानी पिलाएं.
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