
अंडे की एक्सपायरी अंडे पर प्रिंट करने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं. एक अप्रैल से इसे लेकर चेकिंग शुरू होनी थी, लेकिन बिना किसी अधिकारिक बयान के चेकिंग रोक दी गई. जबकि एक्सपायरी से जुड़ी डिटेल अंडे पर प्रिंट करने का आदेश चार साल पहले जारी हो चुका था, लेकिन अभी तक इसका पालन नहीं हो पा रहा है. जिसके चलते पोल्ट्री फार्मर से लेकर अंडे खाने के शौकीन लोगों के बीच भ्रम की स्थिडति है. इस मामले में नेशनल ऐग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) ने एक बड़ा बयान दिया है. किसान तक को दिए इंटरव्यू में उनका कहना है कि हम पोल्ट्री फार्मर के हित में काम करते हैं. लेकिन हमारी मांग है कि सरकार भी पोल्ट्री फार्मर के हितों का ख्याल रखते इसे लागू करे.
गौरतलब रहे साल 2022 में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और यूपी सरकार ने अंडों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक आदेश जारी किया था. अंडे बेचने वाले पोल्ट्री फार्मर को अंडे के ऊपर उससे जुड़ी जानकारी प्रिंट करने के आदेश दिए गए थे. इसमे अंडे की एक्सपायरी भी शामिल थी. यूपी सरकार ने तो अंडों का स्टोर करने और उन्हें ट्रांसपोर्ट करने संबंधी नियम पर जारी किए गए थे.
एनईसीसी के सीईओ अजीत सिंह ने किसान तक को बताया कि इस आदेश के जारी होते ही कई तरह की परेशानियों का सामना पोल्ट्री फार्मर को करना पड़ेगा. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि इस तरह का आदेश पूरे देश में एक साथ लागू होना चाहिए. क्योंकि एक साथ लागू न होने से कुछ परेशानियां आएंगी.
जैसे किसी राज्य में रोजाना 50 लाख अंडों का उत्पादन होता है. लेकिन खपत 1.5 करोड़ अंडों की है. लेकिन अंडों पर प्रिंटिंग का आदेश एक ही राज्य में है. तो ऐसे में कोई दूसरे राज्य से उस राज्य की डिमांड पूरी करने के लिए अंडा क्यों लाएगा. और जब ऐसा होगा तो फिर अंडे के दाम बढ़ेंगे.
सीईओ अजीत सिंह का कहना है कि अंडों पर एक्सपायरी प्रिंट करने के आदेश के चलते अंडों की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा. साथ ही अंडों पर प्रिंटिंग के लिए मशीर खरीदनी होगी. जिसके चलते एक मुश्त मोटा खर्च होगा. मशीन लगाने पर कर्मचारी रखना पड़ेगा. इस सब के चलते लागत बढ़ेगी. अब इस बढ़ी हुई लागत और मशीन में एक मुश्त होने वाले खर्च को कौन देगा. इसलिए हमारी मांग ये है कि सरकार पोल्ट्री फार्मर, ऐग रिटेलर और ग्राहक के हितों का ख्याल रखते हुए ही कोई फैसला ले.
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