डेयरी के लिए फायदेमंद गायबाजार में गाय के दूध से बने घी की डिमांड लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि देसी गायों की डिमांड बढ़ने लगी है. पहले जहां जर्सी और एचएफ गायों की डिमांड होती थी, वहीं अब देसी गाय जैसे गिर, साहीवाल, राठी, हरियाणा नस्ल और थारपारकर आदि नस्ल की डिमांड खूब होने लगी है. क्योंकि गाय के दूध से बने घी को एक दवाई के रूप में भी माना जाता है. पाचन क्रिया के लिए भी गाय के दूध से बने घी को ही अच्छा माना जाता है.
देसी गाय के दूध में ही सिर्फ ए2 होता है. देश में देसी गायों की नस्लों की संख्या भी बढ़ रही है. हाल ही में कृषि मंत्रालय ने गायों की 10 और नई नस्ल को रजिस्टर्ड किया है. इससे पहले गायों की रजिस्टर्ड नस्ल की संख्या 41 थी जो अब 51 हो गई है. पोडा थुरुपू, नारी, डागरी, थूथो, श्वेता कपिला, हिमाचली पहाड़ी, पूर्णिया, कथानी, सांचौरी और मासिलुम है. नागालैंड की थूथो नस्ल भी रजिस्टर्ड हो कर देसी गायों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं.
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