Desi Cow Milk: दूध के लिए गाय खरीद रहे हैं तो ये है 10 देसी गायों की पहचान 

Desi Cow Milk: दूध के लिए गाय खरीद रहे हैं तो ये है 10 देसी गायों की पहचान 

Desi Cow Milk गाय के दूध से बने घी को अगर बिलोकर बनाया जाता है तो उसका महत्व और बढ़ जाता है. मध्य प्रदेश, यूपी, राजस्थान, गुजरात और बिहार में देसी नस्ल की गायों की सबसे ज्यादा संख्या है. मेरठ, यूपी में देश का सबसे बड़ा कैटल रिसर्च सेंटर बनाया गया है. देसी नस्ल की गायों की संख्या बढ़ाने के लिए आर्टिफिशल सीमेन टेक्नोलॉजी भी इस्तेमाल की जा रही है. 

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Desi Cow Milk: दूध के लिए गाय खरीद रहे हैं तो ये है 10 देसी गायों की पहचान डेयरी के लिए फायदेमंद गाय

बाजार में गाय के दूध से बने घी की डिमांड लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि देसी गायों की डिमांड बढ़ने लगी है. पहले जहां जर्सी और एचएफ गायों की डिमांड होती थी, वहीं अब देसी गाय जैसे गिर, साहीवाल, राठी, हरियाणा नस्ल और थारपारकर आदि नस्ल की डिमांड खूब होने लगी है. क्योंकि गाय के दूध से बने घी को एक दवाई के रूप में भी माना जाता है. पाचन क्रिया के लिए भी गाय के दूध से बने घी को ही अच्छा माना जाता है. 

देसी गाय के दूध में ही सिर्फ ए2 होता है. देश में देसी गायों की नस्लों की संख्या भी बढ़ रही है. हाल ही में कृषि मंत्रालय ने गायों की 10 और नई नस्ल को रजिस्टर्ड किया है. इससे पहले गायों की रजिस्टर्ड नस्ल की संख्या 41 थी जो अब 51 हो गई है. पोडा थुरुपू, नारी, डागरी, थूथो, श्वेता कपिला, हिमाचली पहाड़ी, पूर्णिया, कथानी, सांचौरी और मासिलुम है. नागालैंड की थूथो नस्ल भी रजिस्टर्ड हो कर देसी गायों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं. 

ऐसे करें देसी गायों की पहचान 

  • गिर गाय की पहचान उसके लटके हुए कान, काली आंखें और फैले हुए सींग होते हैं. ये गुजरात की नस्ल  है.     
  • साहीवाल गाय की पहचान उसका लाल और भूरा रंगा होता है. मूल रूप से पाकिस्तान की नस्ल है.   
  • राठी गाय भूरे, सफेद और लाल रंग की धब्बेदार होती है. इसका मूल स्था न राजस्थान है. 
  • नागोरी गाय की थूथन सींग और खुर पूरी तरह से काले होते हैं. ये राजस्थान के जोधपुर की नस्ल है. 
  • थारपारकर गाय के कान के अंदर की त्वचा का रंग पीला होता है और ये राजस्थान की नस्ल‍ है.     
  • हरियाणवी गाय ज्यादातर सफेद या भूरे रंग में पाई जाती है. इनका चेहरा संकरा और सींग बड़े होते हैं. नाम के मुताबिक ही ये हरियाणा की नस्ल है. 
  • कांकरेज गाय की पहचान इसके बड़े सींग हैं और ये ज्यादातर गुजरात में ही पाई जाती है. 
  • बद्री गाय का बड़ा ही महत्व है. इसकी पहचान भी खासतौर पर रंग से ही होती है. ये भूरे, सफेद, लाल और काले रंग में होती है. इसका मूल निवास उत्तराखंड है. 
  • पुंगनुर गाय कद में बहुत छोटी होती है. ये तीन से पांच लीटर तक दूध देती है. पीएम भी इसकी तारीफ कर चुके हैं. ये आंध्र प्रदेश में पाई जाती है. 
  • लाल सिंधी गाय नाम के मुताबिक पूरी तरह से लाल रंग की होती है. इसकी नाक भी लाल रंग की ही होती है. ये नस्ल मूल रूप से पाकिस्तान की है.

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