समुद्र में मछली पकड़ने वालों की परेशानी बढ़ाएगा MMPA, जानें क्या है कानून

समुद्र में मछली पकड़ने वालों की परेशानी बढ़ाएगा MMPA, जानें क्या है कानून

समुद्री स्तनधारी जीवों व्हेल, डॉल्फ़िन, पोपाइज़, सील, समुद्री शेर, वालरस, ध्रुवीय भालू, समुद्री ऊदबिलाव, मैनेट और डगोंग का उत्पीड़न, शिकार, पकड़ना, स्टॉक करना और मारना समुद्री स्तनधारी संरक्षण एक्ट (MMPA) में शामिल है. बिना परमिट के संयुक्त राज्य अमेरिका में इन जीवों का आयात भी नहीं किया जा सकता है. 

From the dolphins to the elusive whale shark, you can catch a bevy of sea creatures in the Maldives. Photos: Getty Images, UnsplashFrom the dolphins to the elusive whale shark, you can catch a bevy of sea creatures in the Maldives. Photos: Getty Images, Unsplash
नासि‍र हुसैन
  • NEW DELHI,
  • Jul 25, 2024,
  • Updated Jul 25, 2024, 4:16 PM IST

समुद्र में मछली पकड़ने वाले भारतीय मछुआरे एक नई परेशानी में आ गए हैं. परेशानी की वजह है समुद्री स्तनधारी संरक्षण एक्ट (MMPA). इस एक्ट के चलते समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान ये ध्यान रखना होता है कि कहीं समुद्री स्तनधारी जीव जाल में ना फंस जाएं. मछली पकड़ने के दौरान जाल और दूसरी चीजों से उन्हें चोट ना लग जाए. इतना ही नहीं एक्ट के तहत इन्हें आयात-निर्यात करने को भी प्रतिबंध की कैटेगिरी में रखा गया है. सीफूड एक्सपर्ट की मानें तो समुद्री स्तनधारी जीवों में व्हेल, डॉल्फ़िन, पोपाइज़, सील, समुद्री शेर, वालरस, ध्रुवीय भालू, समुद्री ऊदबिलाव, मैनेट और डगोंग आदि शामिल हैं.

एक्सपर्ट का कहना है कि इसमे से कुछ जीव पूरी तरह से जलीय होते हैं, जैसे व्हेल और डॉल्फ़िन. कुछ ऐसे हैं जैसे सील और समुद्री शेर, ये अपना ज्यादा वक्त पानी में बिताते हैं, लेकिन आराम करने या बच्चों को जन्म देने के लिए जमीन और बर्फ पर आते हैं. इस एक्ट को बनाने का मकसद समुद्री स्तनधारी जीवों को संरक्षण देना, समुद्री तंत्र के संतुलन और महासागर के पर्यावरण को बनाए रखने है. 

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पहले झींगा अब समुद्री स्तनधारी ने बढ़ाई परेशानी 

भारतीय झींगा कई देशों में बहुत पसंद किया जाता है. भारत से करीब आठ लाख टन झींगा निर्यात किया जाता है. चीन के साथ ही अमेरिका बड़ा खरीदार है. तालाब में पालन किए गए झींगा का ही निर्यात होता है. लेकिन जंगली समुद्री झींगा अमेरिका में पूरी तरह से प्रतिबंधि‍त है. समुद्र में दो तरह का झींगा होता है. दूसरा झींगा खूब पसंद किया जाता है. लेकिन उसे पकड़ने में भारतीय मछुआरों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है. अगर उसमे थोड़ा सा भी जंगली झींगा आ गया तो ऑर्डर ही कैंसिल हो जाता है. इसी तरह का एमएमपीए है. इसीलिए इसे मछुआरों के बीच फलते-फूलते निर्यात के लिए एक और चुनौती पेश करने वाला बताया जा रहा है. 

एक अखबार की खबर के मुताबिक केरल मत्स्य थोझिलाली ऐक्य वेदी के अध्यक्ष चार्ल्स जॉर्ज का कहना है कि जंगली-पकड़े गए झींगों पर अमेरिकी प्रतिबंध के बाद पारंपरिक मछली पकड़ने का क्षेत्र पहले से ही गंभीर वित्तीय तनाव से गुजर रहा है. इस नए एक्ट से हालात और खराब हो जाएंगे. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मछली पालन क्षेत्र को एक और संकट से बचाने के लिए इस कदम का मुकाबला करने की रणनीति तैयार करने का आग्रह किया है. 

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केरल में हुई बैठक में जताई थी एमएमपीए पर चर्चा 

गौरतलब रहे मछली पकड़ने वाले समुदायों की परेशानी को देखते हुए केरल सरकार अगस्त 2019 से भारत में जंगली-पकड़े गए झींगों के अमेरिकी प्रतिबंध से निपटने के लिए मछली पकड़ने के जाल में खास तरह के उपकरण (TED) लगाने के तरीकों पर काम कर रही है. फिश एक्सपर्ट ने हाल ही में कोच्चि में आयोजित एक बैठक में एमएमपीए की शुरूआत के साथ भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की, जिससे गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए TED लगाने की कार्य योजना तैयार की जा सके. पारंपरिक मछुआरे जो पहले से ही वित्तीय तनाव में हैं उन्हें डर है कि नए नियम व्यापार में व्यवधान और आर्थिक नुकसान को बढ़ा देंगे. 
 

 

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