
भे़ड़ और बकरी पालन करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. बकरी पालन तीन खास प्रोडक्ट तो भेड़ पालन दो प्रोडक्ट के लिए किया जा रहा है. देश में बकरी के दूध और मीट तो भेड़ के मीट की डिमांड खूब बढ़ रही है. विदेशों से भी बकरे के मीट की डिमांड आ रही है. यही वजह है कि भेड़-बकरी पालन करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. अगर आप भी 100 से लेकर 500 तक भेड़-बकरी पालने की सोच रहे हैं तो आपको 50 लाख रुपये मिल सकते हैं.
केन्द्र सरकार एक खास योजना के तहत भेड़-बकरी पालन करने वालों को वित्तीय सहायता दे रही हैं. इतना ही नहीं बकरी पालन करने से पहले आप केन्द्र सरकार के ट्रेनिंग संस्थानों से बकरी पालन की ट्रेनिंग भी ले सकते हैं. जहां ये सिखाया जाता है कि साइंटीफिक तरीके से बकरी पालन कैसे किया जाए. कोरोना के बाद से देश ही नहीं विदेशों में भी बकरी के दूध और मीट की डिमांड बढ़ रही है.
नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (एनएलएम) के बारे में जानकारी देते हुए केन्द्र सरकार का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति शहर या गांव में बकरी पालन करना चाहता है तो सरकार उसकी मदद करेगी. जैसे कोई 100 बकरी और पांच बकरों के साथ बकरी पालन करना चाहते हैं तो सरकार उसकी कुल लागत 20 लाख रुपये का 50 फीसद हिस्सा 10 लाख रुपये सब्सिडी के तौर पर देगी.
इसी तरह अगर आप 200 बकरी और 10 बकरों के साथ बकरी पालन करना चाहते हैं तो सरकार की तरफ से आपको 20 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी. अगर आपका प्लान 200 से ज्यादा बकरी पालन का है तो 300 बकरी और 15 बकरों के लिए सरकार से 30 लाख रुपये मिलेंगे. 400 बकरी और 20 बकरों के लिए 40 लाख और 500 बकरी, 25 बकरों के लिए केन्द्र सरकार 50 लाख रुपये की सब्सिडी एनएलएम के तहत दे रही है.
केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा में भेड़-बकरी पालन की ट्रेनिंग दी जाती है. यहां बरबरी, जमनापरी, जखराना नस्ल के बकरे-बकरी और मुजफ्फरनगरी नस्ल की भेड़ हैं. भेड़-बकरी के ब्रीड पर भी यहां काम होता है. सीआईआरजी में भेड़-बकरी पालन की साइंटीफिक ट्रेनिंग दी जाती है. यहां पीएचडी (रिसर्च स्कॉलर) और पीजी के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई भी कराई जाती है.
इसके लिए कई यूनिवर्सिटी ने सीआईआरजी के साथ समझौता किया हुआ है. इसमे मथुरा की यूनिवर्सिटी भी शामिल है. विदेशों से डिमांड आने पर उन्हें अच्छी नस्ल के बकरे और बकरी भी उपलब्ध कराए जाते हैं. ट्रेनिंग करने वालों को भी डिमांड के हिसाब से बकरे-बकरी दिए जाते हैं. वहीं विभिन्न कार्यक्रम के तहत पशुपालकों की समय-समय पर मदद भी की जाती है.
Meat Production: पश्चिम बंगाल नहीं, UP को दिया गया मीट उत्पादन में नंबर वन बनने का टॉरगेट
PDFA: ये हैं 80 और 30 लीटर दूध देकर ट्रैक्टर जीतने वालीं गाय-भैंस, गांव में हो रहा स्वागत