दूध से लेकर घी की बात हो तो सबसे पहले गाय का नाम आता है. यही वजह है कि आज गाय के दूध से बना घी हजारों रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है. यही वजह है कि गाय के दूध से बने घी के लिए देसी नस्ल की गायों की सबसे ज्यादा डिमांड हो रही है. इसके पीछे एक बड़ी वजह है गाय के दूध का ए2 होना. ऐसा दावा किया जाता है कि ए2 दूध को देसी घी के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. लेकिन सवाल ये कि प्योर देसी नस्ल की गाय कैसे खरीदें. कैसे पहचान की जाए कि जो गाय खरीद रहे हैं वो प्योर देसी नस्ल की है.
अभी कुछ वक्त पहले ही कृषि मंत्रालय ने गायों की 10 और नई नस्ल को रजिस्टर्ड किया है. इससे पहले गायों की रजिस्टर्ड नस्ल की संख्या 41 थी जो अब 51 हो गई है. लिस्ट में शामिल नई लिस्ट में पोडा थुरुपू, नारी, डागरी, थूथो, श्वेता कपिला, हिमाचली पहाड़ी, पूर्णिया, कथानी, सांचौरी और मासिलुम है. नागालैंड की थूथो नस्ल भी रजिस्टर्ड हो गई है. इसके अलावा गिर, साहीवाल, रेड सिंधी, थारपारकर आदि नस्ल भी हैं.
खरीदने में ऐसे करें देसी गाय की पहचान
- गिर गाय की पहचान उसके लटके हुए कान, काली आंखें और फैले हुए सींग होते हैं. ये गुजरात की नस्ल है.
- साहीवाल गाय की पहचान उसका लाल और भूरा रंगा होता है. ये मूल रूप से पाकिस्तान की नस्लव है.
- राठी गाय भूरे, सफेद और लाल रंग की धब्बेादार होती है. इसका मूल स्थान राजस्थान है.
- नागोरी गाय की थूथन सींग और खुर पूरी तरह से काले होते हैं. ये राजस्थान के जोधपुर की नस्लर है.
- थारपारकर गाय के कान के अंदर की त्वचा का रंग पीला होता है और ये राजस्थान की नस्ल है.
- हरियाणवी गाय ज्यालदातर सफेद या भूरे रंग में पाई जाती है. इनका चेहरा संकरा और सींग बड़े होते हैं. नाम के मुताबिक ही ये हरियाणा की नस्ल् है.
- कांकरेज गाय की पहचान इसके बड़े सींग हैं और ये ज्याादातर गुजरात में ही पाई जाती है.
- बद्री गाय का बड़ा ही महत्वै है. इसकी पहचान भी खासतौर पर रंग से ही होती है. ये भूरे, सफेद, लाल और काले रंग में होती है. इसका मूल निवास उत्तराखंड है.
- पुंगनुर गाय कद में बहुत छोटी होती है. ये तीन से पांच लीटर तक दूध देती है. पीएम भी इसकी तारीफ कर चुके हैं. ये आंध्र प्रदेश में पाई जाती है.
- लाल सिंधी गाय नाम के मुताबिक पूरी तरह से लाल रंग की होती है. इसकी नाक भी लाल रंग की ही होती है. ये नस्ल मूल रूप से पाकिस्तान की है.
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