Goat Farming: एक साल में कितनी मीथेन गैस छोड़ती है बकरी, कंट्रोल करने को कौनसा चारा हो रहा तैयार 

Goat Farming: एक साल में कितनी मीथेन गैस छोड़ती है बकरी, कंट्रोल करने को कौनसा चारा हो रहा तैयार 

राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर जुगाली करने वाले पशुओं में मीथेन गैस को कंट्रोल और खत्म करने की तैयारी चल रही है. बकरियों के संबंध में इसे कंट्रोल करने के लिए केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा में भी लगातार रिसर्च चल रही है.

नासि‍र हुसैन
  • NEW DELHI,
  • Jan 01, 2025,
  • Updated Jan 01, 2025, 2:58 PM IST

दुनियाभर में मीथेन गैस उत्सर्जन के लिए दुधारू पशुओं को बड़ा जिम्मेदार माना जा रहा है. इसीलिए जब भी ग्लोबल वार्मिंग पर चर्चा होती है तो मीथेन गैस का नाम सबसे पहले आता है. उसकी एक वजह ये भी है कि देश ही नहीं दुनियाभर में पशुओं की संख्या ज्यादा है. एनीमल एक्सपर्ट की मानें तो जुगाली करने वाले पशु जैसे गाय-भैंस और भेड़-बकरी भी मीथेन गैस छोड़ते हैं. मीथेन गैस छोड़ने के मामले में बकरी तीसरे नंबर पर है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इसे कंट्रोल करने के लिए काम नहीं हो रहा है.

केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा में लगातार रिसर्च चल रही है. अच्छी बात ये है कि एक खास तरह का चारा तैयार कर इस रिसर्च में काफी हद तक कामयाबी भी मिल चुकी है. साइंटिस्ट की मानें तो चारे के क्षेत्र में लगातार कामयाबी मिल रही है. इसी के चलते पैलेट फीड और फोडर तैयार किया गया है. 

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तीसरे नंबर की बकरी एक साल में छोड़ती है पांच किलो मीथेन 

सीआईआरजी के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. रविन्द्र  कुमार ने किसान तक को बताया कि मीथेन गैस छोड़ने के मामले में पहला और दूसरा नंबर भैंस और गाय का है. बकरी इस मामले में तीसरे नंबर पर है. बेशक बकरी गाय-भैंस के मुकाबले कम मीथेन गैस छोड़ती है, लेकिन गाय-भैंस के अनुपात में बकरियों की संख्या ज्यादा है. इसलिए बकरियों के संबंध में काम भी ज्यादा और तेजी के साथ हो रहा है. हम एक खास तरह के उपकरण की मदद से बकरी से निकलने वाली मीथेन गैस को जमा करते हैं. उसकी नापतौल करते हैं. इसके आधार पर ही बकरियों के लिए खास तरह का हरा चारा और पैलेट फीड तैयार किया जा रहा है. 

बकरियों में मीथेन कंट्रोल करने को उठाए जा रहे ये कदम 

सीआईआरजी से जुड़े जानकारों की मानें तो बहुत सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए बकरियों के लिए हरा चारा तैयार किया जा रहा है. सीआईआरजी में ट्रेनिंग के लिए आने वाले युवाओं को ऑर्गनिक और नेचुरल तरीके से चारा उगाने के बारे में भी बताया जाता है. ऑर्गनिक और नेचुरल तरीके से उगाए जा रहे चारे के लिए खाद कैसे तैयार करनी है ये जानकारी भी ट्रेनिंग लेने के लिए आने वाले युवाओं को दी जाती है. साथ ही हरे चारे का इस्तेामाल करते हुए साइलेज और पैलेट्स बनाने के बारे में भी बताया जाता है. 

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