Halal Meat: कुवैत-कतर समेत 14 देशों के हलाल मीट प्रोजेक्ट को लगा तगड़ा झटका

Halal Meat: कुवैत-कतर समेत 14 देशों के हलाल मीट प्रोजेक्ट को लगा तगड़ा झटका

Halal Meat ओमान ने भारत के हलाल मीट सर्टिफिकेट को मान्यता दे दी है. इसके बाद भारत ने अब दूसरे 14 देशों की ओर भी रुख किया है. इसी तरह की मान्यता सरकार 14 दूसरे देशों से भी चाहती है. इसके लिए केन्द्र सरकार से मान्यता प्राप्त देश की तीन संस्थाएं मीट एक्सपोर्टर को हलाल सर्टिफिकेट देंगी. संस्थाओं को भारत अनुरूपता मूल्यांकन योजना (I-CAS) के हलाल से जुड़े मानकों का पालन करना होगा.

ICAS halal Meat CertificationICAS halal Meat Certification
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 03, 2026,
  • Updated Apr 03, 2026, 3:00 PM IST

भारत बड़ी मात्रा में बफैलो मीट का एक्सपोर्ट करता है. भारत से मीट के खरीदारों में खाड़ी के देश भी शामिल हैं. बिना किसी रोक-टोक के मानकों के अनुसार इन देशों को मीट एक्सपोर्ट हो रहा है. लेकिन इसके अलावा भारत हलाल मीट के बाजार में सेंध लगाने की तैयारी कर रहा था. एक खास प्रोजेक्ट के तहत करीब 14 देशों के हलाल मीट बाजार में काम किया जा रहा था. लेकिन मौजूदा इजराइल-अमेरिका और ईरान वॉर से भारत के हलाल मीट प्रोजेक्ट को तगड़ा झटका लगा है. लड़ाई के चलते सभी तरह की सप्लाई बंद हो गई है. किसी भी तरह का मीट एक्सपोर्ट नहीं हो रहा है. 

भारत के लिए ये प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है कि भारत के बोवाइन मीट को दुनियाभर के ज्यादातर देशों में पसंद किया जाता है. इतना ही नहीं एक इंटरनेशनल रिपोर्ट के मुताबिक साल 2027 में विश्व का हलाल मीट कारोबार चार लाख करोड़ का हो जाने की उम्मीद है. यही वजह है कि विश्व के मीट बाजार के एक बड़े हिस्से पर कब्जे के लिए सरकार जोर-शोर से तैयारी कर रही है. 14 देशों में ज्यादातर खाड़ी देश हैं. ओमान में भारत हलाल मीट की सप्लाई शुरू कर चुका है.   

मीट के लिए ये देश हैं भारत की लिस्ट में  

विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से जारी हुई लिस्ट के मुताबिक भारत से बहरीन, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, मलेशिया, ओमान, फिलीपींस, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात को हलाल मीट एक्सपोर्ट किया जाएगा. इसमे ओमान से मान्यता मिल चुकी है. भारतीय गुणवत्ता परिषद इसकी निगरानी करेगी. साथ ही सरकार से मान्यता प्राप्त देश की तीन संस्थाएं लखनऊ का हलाल शरीयत इस्लामिक लॉ बोर्ड (HASIL), मुम्बई का JUHF सर्टिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड और जमीयत उलमा ए हिंद हलाल ट्रस्ट इन्हें हलाल मीट होने का सर्टिफिकेट देंगी.  

हलाल के हिसाब से सेट होती है मशीनों की टाइमिंग 

आपको ये जानकर हैरत होगी लेकिन सच ये ही है कि मीट प्रोसेसिंग यूनिट में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की टाइमिंग भी हलाल सर्टिफिकेट के नियमों के मुातबिक सेट की जाती है. अगर मशीनों की टाइमिंग हलाल के हिसाब से नहीं है तो उस कंपनी को सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा. इतना ही नहीं कंपनी में जानवर या मुर्गे को हलाल (काटने) करने वाला कर्मचारी मुस्लिम होना जरूरी है.

बढ़ गया सवा लाख टन मीट एक्सपोर्ट

एपीडा के जारी आंकड़ों पर जाएं तो अकेले बफैलो मीट का एक्सपोर्ट ही बीते तीन साल में सवा लाख टन बढ़ गया है. आंकड़ों के मुताबिक साल 2021-22 में 11 लाख, 75 हजार, 193 टन बफैलो का एक्सपोर्ट हुआ था. वहीं साल 2022-23 में 11 लाख, 75 हजार, 869 टन मीट एक्सपोर्ट हुआ था. लेकिन साल 2023-24 का आंकड़ा खासा चौंकाने वाला है. बीते साल 12 लाख, 95 हजार, 603 टन बफैलो मीट का एक्सपोर्ट भारत से दुनिया के अलग-अलग देशों को हुआ था. इसकी कीमत 31 हजार करोड़ रुपये थी.

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