10 महीने में बिक्री के लिए तैयार हो जाती है ये बकरी, बिहार के लिए खास है ये नस्ल

10 महीने में बिक्री के लिए तैयार हो जाती है ये बकरी, बिहार के लिए खास है ये नस्ल

पशु चिकित्सकों के मुताबिक, बिहार के किसानों को देसी नस्ल की बकरियां पालना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहेगा. अगर वे चाहें तो बर्बरी, बीटल जखराना और ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियों का पालन कर सकते हैं. लेकिन इनमें से ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियां बिहार की जलवायु के लिए सबसे अच्छी हैं.

बकरी की ये है बेहतरीन नस्ल. (सांकेतिक फोटो)बकरी की ये है बेहतरीन नस्ल. (सांकेतिक फोटो)
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 15, 2024,
  • Updated Jul 15, 2024, 2:39 PM IST

बिहार में किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं. इससे उन्हें अच्छी कमाई हो जाती है. बड़े जोत वाले किसान जहां गाय-भैंस का पालन करते हैं, वहीं छोटे और सीमांत किसान बकरी का बिजनेस करते हैं. लेकिन कई बार सीमांत किसानों को बकरी पालन में आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है, क्योंकि वे मौसम और जलवायु के हिसाब से बकरी की नस्लों का चयन नहीं करते हैं. ऐसे में अधिक सर्दी और अधिक गर्मी पड़ने से बकरियों की मौत भी हो जाती है. लेकिन अब बिहार के किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. आज हम बकरी की कुछ ऐसी नस्लों के बारे में बात करेंगे, जिसे पालकर प्रदेश के किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं.

पशु चिकित्सकों के मुताबिक, बिहार के किसानों को देसी नस्ल की बकरियां पालना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहेगा. अगर वे चाहें तो बर्बरी, बीटल जखराना और ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियों का पालन कर सकते हैं. लेकिन इनमें से ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियां बिहार की जलवायु के लिए सबसे अच्छी हैं. इस नस्ल की बकरियां बिहार के मौसम में जल्द ही ढल जाती हैं. सामान्य तरीके से रख-रखाव करने पर भी इनके स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है. साथ ही इनका पालन करने में खर्च भी कम आता है. खास बात यह है कि ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियां बिहार और पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक पाली जाती हैं.

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इतना होता है वजन

दरअसल, ब्लैक बंगाल नस्ल के बकरे का वजन 18 से 20 किलो और मादा बकरी का वजन 15 से 18 किलो तक होता है. इनका आहार भी कम होता है. ऐसे में कम खर्च में ही इसका बिजनेस शुरू किया जा सकता है. खास बात यह है कि ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियां 10 महीने में बड़ी हो जाती है. यानी आप इसकी बिक्री कर सकते हैं. ये बकरियां अपने जीवन काल में 50 से 57 लीटर दूध देती हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इस नस्ल की बकरियां दो साल में तीन बार बच्चे को जन्म देती हैं.

इस तरह करें पकरी का पालन

ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियों को हरी घास बहुत पसंद होती है. हालांकि, ये पेड़ के पत्ते भी खाती हैं. इन बकरियों को रोज तीन किलो तक हरा चारा खिला सकते हैं. इसके आलाव आप 300 ग्राम दाना भी खाने में दे सकते हैं. यदि आप इन बकरियों को खेतों में चराते हैं तो 100 ग्राम दाना देना होगा. यदि आप इस नस्ल की बकरियों का पालन करना चाहते हैं, तो आपको इनके रहने के लिए 900 स्क्वायर फीट जमीन की जरूरत होगी. इसमें 300 स्क्वायर फीट में बकरी के रहने के लिए  शेड बनाना पड़ेगा और 600 स्क्वायर फीट में घूमने के लिए जगह छोड़नी पड़ेगी. ऐसे में हम कह सकते हैं कि ब्लैक बंगाल बिहार के किसानों के लिए सबसे अच्छी नस्ल है. इसका पालन करने पर किसान अच्छी कमाई करेंगे.

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