
हिमालयी याक को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा फैसला किया है. दरअसल, FSSAI ने हिमालयी याक को 'खाद्य पशु' (Food Animal) के तौर पर मंजूरी दे दी है. वहीं, पारंपरिक दूध और मांस उद्योगों में हिमालयी याक को शामिल करने से पर्वतीय इलाकों में रहने वाले गोवंशीय जानवरों की आबादी में गिरावट पर रोकने में मदद मिलेगी.
याक से जुड़े राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र (एनआरसी-याक) ने याक को खाद्य पशु में मान्यता देने के लिए 2021 में एफएसएसएआई (FSSAI) को एक प्रस्ताव दिया था. हालांकि, एनआरसी-याक के निदेशक डॉ. मिहिर सरकार के अनुसार, एफएसएसएआई से हाल ही में यह मंजूरी पशुपालन एवं डेयरी विभाग की सिफारिश के बाद मिली है.
डॉ. सरकार के अनुसार, एफएसएसएआई द्वारा याक को एक खाद्य उत्पादक जानवर के रूप में मान्यता देने से किसानों को आर्थिक रूप से लाभान्वित होने में मदद मिलेगी. डॉ. सरकार के अनुसार, देश की याक आबादी पिछले कुछ वर्षों में खतरनाक दर से घट रही है. 2019 में सबसे हालिया पशुधन गणना के अनुसार, भारत में 58,000 याक हैं, जो 2012 में पिछली पशुधन गणना से 25% कम है.
डॉ. सरकार के अनुसार, भारत में याक की आबादी में यह भारी गिरावट स्थानीय उपयोगकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों और पशु आनुवंशिक विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने वालों के लिए चिंता का विषय बन गई है.
डॉ. सरकार के अनुसार, याक का दूध अत्यधिक पौष्टिक, वसा में उच्च, आवश्यक खनिज युक्त और औषधीय गुणों से भरपूर होता है. वहीं, याक किसान इसके मांस से विभिन्न प्रकार के पारंपरिक उत्पाद बनाते हैं. हालांकि ये उत्पाद स्थानीय समुदाय तक सीमित हैं, स्थानीय स्तर पर उत्पादित और बेचे जाते हैं.
इसके अलावा, याक का दूध और मांस पारंपरिक डेयरी और मांस उद्योगों का हिस्सा नहीं है; उनकी बिक्री स्थानीय उपभोक्ताओं तक सीमित है. हालांकि, इन दूध और मांस उत्पादों के व्यावसायीकरण से उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों के आय में भी इजाफा होगा.