
इंसान ही नहीं पशुओं पर भी गर्मी के मौसम और बढ़ते हुए तापमान का असर जानवरों पर भी होता है. गर्मी की दस्तक के साथ ही बहुत सारे पशुओं का व्यवहार आक्रामक हो जाता है. इसमे से कुत्ता भी एक है. अगर हम गौर करें तो गर्मियों में कुत्तों का व्यवहार एकदम से बदल जाता है. यही वजह है कि गर्मी बढ़ते ही डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं. इस बारे में एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि गली के कुत्तों के आक्रामक होने की सबसे बड़ी वजह ये है कि हम इंसानों ने उनसे उनके रहने और खाने की जगह छीन ली है.
पर्यावरण और गंदगी को देखते हुए कुत्तों के खाने-पीने की जगहें बंद हो गई हैं. इतना ही नहीं कई वजहों से हमने कुत्तों को खाना डालना भी बंद कर दिया है. लेकिन ऐसा नहीं है कि गर्मी का मौसम आया है तो कुत्ते इंसानों पर अटैक करेंगे ही करेंगे. मानों गर्मी के दौरान इंसानों को काटना उनकी आदत में हो. अगर गर्मी और कुत्तों के व्यवहार को देखते हुए हम भी कुत्तों के प्रति थोड़ा सा अपना व्यवहार बदल लें तो फिर कुत्ते इंसानों पर न तो अटैक करेंगे और न ही उन्हें काटेंगे.
डॉग डिपार्टमेंट के मेडिसिन हैड डॉ. अश्वनी कुमार शर्मा का कहना है कि गर्मियों के दौरान आसपास घने पेड़ न होने के चलते कुत्तों को छांव भी नहीं मिल पाती है. घर के आसपास ठंडी जगह में हम उन्हें बैठने नहीं देते हैं. कार के नीचे बैठें तो हम उन्हें मारने लगते हैं. ऐसे वक्त न तो उन्हें खाना ही मिल पाता है और ना ही पानी. ऐसा भी नहीं होता है कि कोई उनके बदन पर पानी डाल दे तो उन्हें कुछ राहत मिले. जागरुकता की कमी के चलते लोग गली के कुत्तों की परेशानी को समझ नहीं पाते हैं. उन्हें इस वक्त खाने से ज्यादा पानी की जरूरत होती है.
डॉ. अश्वनी कुमार शर्मा का कहना है कि खासतौर पर गर्मी के इस मौसम में कुत्ते बहुत ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं. उसकी वजह ये है कि 40 से 45 डिग्री तापमान होने पर उनकी यह गर्मी और बढ़ जाती है. इंसानों की तरह से कुत्तों की गर्मी पसीने की तरह से नहीं निकलती है. मुंह के रास्ते ली जाने वाली सांस से वो अपने शरीर की गर्मी को मेंटेन करते हैं. जब गर्मी बहुत बढ़ जाती है तो ऐसा करने में उन्हें बहुत तकलीफ होती है. इसके चलते उनके अंदर चिढ़-चिढ़ापन आ जाता है.
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