गोबर बना कमाई का जरिया! गांव की रसोई तक पहुंची बायोगैस

गोबर बना कमाई का जरिया! गांव की रसोई तक पहुंची बायोगैस

बिहार के बोधगया में गृहणियों को रसोई के लिए उपला बनाने और उसके धुएं की बदहाली से हमेशा-हमेशा के लिए छुटकारा मिल चुका है. दरअसल, गांव में बायो गैस प्लांट के लगने से गृहणियों को काफी कम कीमत पर रसोई के लिए बायो गैस मिल रहा है.

गांव की रसोई तक पहुंची बायोगैसगांव की रसोई तक पहुंची बायोगैस
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 11, 2026,
  • Updated Mar 11, 2026, 1:15 PM IST

बिहार के गया जी के बोधगया ब्लॉक अंतर्गत बतसपुर गांव में गृहणियों को रसोई के लिए उपला बनाने और उसके धुएं की बदहाली से हमेशा-हमेशा के लिए छुटकारा मिल चुका है. इन महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)/लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत स्थापित गोबर-धन योजना से आया है. गांव में बायो गैस प्लांट के लगने से गृहणियों को काफी कम कीमत पर रसोई के लिए जहां बायो गैस मिल जा रहा है. वहीं, पशु के गोबर के निराकरण के लिए भी एक ऐतिहासिक पहल शुरू हो गई है.

बायोगैस प्लांट से पशुपालकों को हो रही कमाई

बतसपुर गांव में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण वर्ष 2023 में गोबर-धन योजना के तहत बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया है. करीब 50 लाख रुपये की लागत से स्थापित प्लांट में गोबर खपत की क्षमता प्रतिदिन 2 टन है. इसके लिए गोबर गांव में ही 50 पैसे/किलो की दर से पशुपालकों से खरीदा जा रहा है. इससे जहां पशुपालकों की अतिरिक्त कमाई हो रही है वहीं प्लांट में लगे पाइपलाइन से बायोगैस ग्रामीणों की रसोई तक पहुंचाया जा रहा है.  

गांव के करीब 35 घरों में बायोगैस की आपूर्ति

मौजूदा समय में प्लांट से गांव के करीब 35 घरों में बायोगैस की आपूर्ति की जा रही है. गांव के लोगों का कहना है कि बायोगैस प्लांट की स्थापना से एक तरफ गांव में उत्पादित होने वाले गोबर का सही उपयोग हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को ईंधन के लिए बायोगैस भी मिलने लगा है. प्लांट से निकलने वाला बायो कंपोस्ट काफी कम कीमत पर किसानों को बेचा जा रहा है.  

वर्ष 2025-26 में बतसपुर बायो गैस प्लांट में उत्पादित गैस और बायो कंपोस्ट      

गोबर की खपतबायोगैस का उत्पादनकंपोस्ट का उत्पादन
(किलोग्राम में) (घन मीटर में)           (किलोग्राम में)
 102518    2658  16504

एलपीजी की तुलना में आधी कीमत पर मिल रहा गैस

बोधगया के बतसपुर की रहने वाली शोभा देवी ने बताया कि बायोगैस प्लांट की स्थापना के बाद रसोई में गृहणियों की सहूलियत बढ़ गई है. उन्हें घंटों उपला बनाने, सूखाने और घर में स्टोर करने की समस्या के साथ ही धुआं से सराबोर रसोई से पूरी तरह छुटकारा मिल चुका है. इससे घर में स्वच्छता बढ़ी है और प्रदूषण की समस्या हमेशा-हमेशा के लिए दूर हुई है. महिलाओं को एलपीजी गैस की तुलना में आधी कीमत पर गांव में ही बायो गैस की सुविधा उपलब्ध है.

बोधगया के बतसपुर में दिखा नया मॉडल

बतसपुर गांव की निर्मला देवी ने बताया कि बायोगैस प्लांट की स्थापना से पहले काफी संघर्ष करना पड़ता था. हर दिन सबेरे उठकर गोबर से उपला बनाने की चिंता बनी रहती थी. रसोई में उपलों के जलने वाले चूल्हे से बहुत धुआं निकलता था. इससे  कई परेशानियां होती थीं. धुएं के कारण आंखों में जलन और खांसी की शिकायत हमेशा बनी रहती थी और अक्सर खांसी की समस्या भी बनी रहती थी. बरसात के दिन में महिलाओं की कठिनाई काफी बढ़ जाती थी. उपला के न सूखने की वजह से चूल्हा जलाना मुश्किल हो जाता था. लेकिन यह समस्या अब स्थाई रूप से दूर हो चुकी है. महिलाओं की जीवन-स्तर के साथ पूरी रसोई की सूरत बदल चुकी है.

अन्य जिलों से ऐसी पहल की उम्मीद: मंत्री श्रवण कुमार

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि बायोगैस से लकड़ी, कोयला और केरोसिन जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होती है. इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे जलवायु परिवर्तन में संभावित योगदान कम होता है. इसके साथ  बायोगैस ऊर्जा का एक स्वच्छ स्रोत है और इससे घर के अंदर वायु प्रदूषण और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं कम होती हैं. गया और पूर्वी चंपारण में बायो गैस प्लांट के पायलट प्रोजेक्ट सफल रहे हैं. लोहिया स्वच्छ मिशन के तहत सामुदायिक बायोगैस संयंत्रों को बढ़ावा देने के लिए विभाग के पास पर्याप्त धनराशि है. केंद्र सरकार भी विकेंद्रीकृत तरीके से बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने में सहयोग कर रही है. हमें अन्य जिलों से भी इसी तरह की पहल की उम्मीद है. 

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