Animal Care: पशुपालन में जरूर करें ये तीन काम, हर मौसम में होगा मुनाफा, पशु भी रहेंगे हेल्दी

Animal Care: पशुपालन में जरूर करें ये तीन काम, हर मौसम में होगा मुनाफा, पशु भी रहेंगे हेल्दी

Animal Care पशुपालन में गाय-भैंस को सबसे ज्यादा बीमारियां तो मौसम के हिसाब से होती हैं. मौसम में बदलाव हो रहा है तो इसका असर पशुओं पर पड़ता है. मौसम का उतार-चढ़ाव पशुओं में तनाव पैदा करता है. उत्पादन कम होने लगता है. कई बार तो पशु गंभीर रूप से बीमार तक पड़ जाते हैं. 

जर्सी गाय से पैदा हुए बेस्ट नस्ल के बछड़ेजर्सी गाय से पैदा हुए बेस्ट नस्ल के बछड़े
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 03, 2026,
  • Updated Mar 03, 2026, 8:42 AM IST

सबसे पहले तो मौसम का बदलाव पशुपालकों के लिए बड़ी परेशानी बनता है. उसके बाद मौसम का असर पशुओं के उत्पादन पर पड़ता है, जिसका नुकसान पशुपालकों को कई तरह से उठाना पड़ता है. खासतौर पशु का उत्पादन तो कम होता ही है, लेकिन लागत के तौर पर चारे के खर्च में कोई कमी नहीं आती है. इसीलिए एनिमल एक्सपर्ट पशुपालकों को हर मौसम में अलर्ट रहते हुए गाय-भैंस की देखभाल करने की सलाह देते हैं. क्योंकि कई बार जरा सी लापरवाही इतनी भारी पड़ जाती है कि पशु की मौत तक हो जाती है. 

लेकिन, अगर अलर्ट रहकर पशुपालन किया जाए तो किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार कई तरह की योजनाएं चला रही है. ऐसी ही अगर तीन खास योजनाओं का फायदा पशुपालक उठा लें तो फिर पशुपालन में नुकसान की संभावनाएं कम रह जाएंगी. हालांकि पशुपालन विभाग के अफसर और एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ गलतफहमियों के चलते पशुपालक योजनाओं का फायदा नहीं उठाते हैं.

बड़े नुकसान से बचाता है पशु बीमा

अगर आपके पशु का बीमा है तो फिर प्राकृतिक आपदा या किसी भी तरह की बीमारी जो खासतौर पर मौसम के चलते ज्यादा होती हैं से मौत होने पर बीमा की रकम मिल जाती है. यहां तक की बरसात के मौसम में ही कई तरह के जहरील कीड़े पशुओं को काट लेते हैं और उनकी मौत हो जाती है. 

बीमारी से बचाने में मददगार है टीकाकरण 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि सर्दी, गर्मी और बरसात के मौसम में पशुओं को कई तरह की बीमारी होती हैं. दूषित चारा खाने से, दूषित पानी पीने से भी पशु बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं. खुरपका-मुंहपका, थनेला समेत और तमाम बीमारियां भी इस मौसम में पशुओं को अपने चपेट में ले लेती हैं. लेकिन समय-समय पर पशुओं को लगने वाले टीके हम अपने पशुओं को लगवाते रहेंगे तो पशु बीमारी की चपेट में नहीं आएंगे.

दूध के संबंध में हकीकत तो ये है कि जब हमारा पशु कई तरह की बीमारियों से ग्रसित होगा तो उसका दूध उत्पादन घटेगा ही घटेगा. और टीकाकरण से पशु बीमारी से बचकर स्वस्थ  रहता है. और हम अच्छी तरह से जानते हैं कि जब पशु पूरी तरह ठीक होता है तो वो दूध भी खूब देता है. फिर वो चाहें भेड़-बकरी हो या फिर गाय-भैंस. 

ईयर टैग से एक नहीं कई फायदे हैं 

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं के कान में लगने वाले टैग को लेकर कई तरह की गलतफहमी हैं. जैसे अगर कान में टैग लगा है तो इसका मतलब पशु बैंक लोन की रकम से खरीदा गया है. यही वजह है कि आज भी बहुत सारे लोग पशुओं में ईयर टैगिंग कराने से कतराते हैं. जबकि इसे लगवाने के बाद चोरी होने पर आप अपने पशु को देश के किसी भी कोने से तलाश कर ला सकते हैं.

क्योंकि टैगिंग होने के बाद आपके पशु का आधार कार्ड जैसा नंबर तैयार हो जाता है. उस नंबर से पशु को सभी तरह की योजनाओं का फायदा भी मिलता है. साथ ही अगर आपका पशु किसी कारणवश मर जाता है तो बीमा की रकम मिलने में भी आसानी रहती है.   

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