Cow and Daily Diet: पशुओं की खुराक में ये तीन चीजें कम हुईं तो एक्टिव हो जाएगा बोटुलिज्म

Cow and Daily Diet: पशुओं की खुराक में ये तीन चीजें कम हुईं तो एक्टिव हो जाएगा बोटुलिज्म

Cow and Daily Diet एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक पशुओं को बोटुलिज्म बैक्टीरिया से बचाने के लिए उन्हें जरूरत के हिसाब से मिनरल मिक्चर, हरा और सूखा चारा वाली खुराक यानि बैलेंस डाइट खाने को दें. साथ में पीने के साफ और ताजा पानी का भी खास ख्याल रखें. ऐसा करने से पशुओं के शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं होगी और वो यहां-वहां गंदी चीजें नहीं खाएंगे.  

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 03, 2026,
  • Updated Apr 03, 2026, 11:37 AM IST

पशु उत्पादन करने वाला हो या ड्राई, सभी को न्यूट्रीशन से भरपूर खुराक की जरूरत होती है. गाय-भैंस हो या भेड़-बकरी सभी को दिनभर में रोजाना एक तय खुराक चाहिए. और दिनभर की खुराक ऐसी होनी चाहिए जिसमे मिनरल मिक्चर, हरा चारा और सूखा चारा शामिल हो. इसके साथ ही साफ, ताजा और हेल्दी पीने का पानी होना चाहिए. अगर आपके पशु को दी जा रही रोजाना की खुराक में ये सब शामिल नहीं है तो आपका पशु गंभीर बीमारी का शिकार हो सकता है. बोटुलिज्म बैक्टीरिया पशुओं के शरीर में एक्टिव हो सकता है. 

अगर एक बार ये बैक्टीरिया एक्टिक हो गया तो पशु की मौत हो सकती है. एक्सपर्ट की मानें तो खासतौर पर अप्रैल से जून तक इस बीमारी का असर देखने को मिलता है. हालांकि इसके पीछे एक वजह हरे चारे की कमाई भी बताई जा रही है. लेकिन अफसोस इस बात का है कि इस बीमारी का ना तो कोई टीका है और ना ही कोई इलाज. 

गायों में ऐसे फैलता है बोटुलिज्म बैक्टीरिया

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि गर्मी के दिनों में खासतौर पर हरे चारे की कमी हो जाती है. पीने के पानी की भी कमी हो जाती है. पशु भूखे-प्यासे यहां-वहां घूमते रहते हैं. इसी के चलते पशुओं के शरीर में कैल्शियम समेत दूसरे मिनरल्स की कमी हो जाती है. जिसके चलते होता ये है कि जब पशु को खुले मैदान में कोई मृत पशु दिखाई देता है तो वो उसकी हड्डी खाने लगता है या फिर उसके सड़े हुए शव को चाटता है. और ऐसा होने उस हेल्दी पशु के शरीर में बोटुलिज्म बैक्टी़रिया दाखिल हो जाता है. यही बैक्टीरिया गायों को बीमार करता है. 

ना टीका-ना इलाज, सिर्फ खुराक से बचेगी जान 

एक्सपर्ट का कहना है कि अभी इस बीमारी का कोई टीका नहीं बना है. और ना ही कोई इलाज है. लेकिन हां, इतना जरूर है कि अगर पशुपालक जागरुक रहें तो गायों की मौत का टाला जा सकता है. करना ये है कि जब किसी भी पशु की मौत हो जाए तो उसके शव का अच्छी तरह जमीन के अंदर दफन कर दें. और खास ख्याल रहे कि ऐसा करते वक्त ये देख लें कि जहां मृत पशु को दफन किया जा रहा है उसके आसपास तालाब या पोखर ना हो जहां पशु पानी पीने आते हों. इतना ही नहीं चारागाह की जमीन पर भी मृत पशु को नहीं दफनाना चाहिए.  

ऐसे होती है गायों की मौत 

पशुपालक और एनिमल एक्सपर्ट बताते हैं कि गाय में बोटुलिज्म बैक्टीरिया के दाखि‍ल होते ही पहले गाय के आगे के दोनों पैर जकड़ जाते हैं. मुंह से लार टपकने लगती है. फिर शरीर कमजोर पड़ने लगता है और गाय एक जगह बैठकर रह जाती है. और इस तरह अगले चार से छह दिन में गाय दम तोड़ देती है. 

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