FMD Disease: गाय-भैंस को नहीं होगा खुरपका-मुंहपका, देखभाल में रखें ये सावधानियां 

FMD Disease: गाय-भैंस को नहीं होगा खुरपका-मुंहपका, देखभाल में रखें ये सावधानियां 

FMD Disease एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी अब किसी भी मौसम में पशुओं को अपनी चपेट में ले रही है. हालांकि इसका सबसे ज्यादा असर बरसात में ज्यादा देखने को मिलता है. बड़ी बात ये है कि एफएमडी बीमारी मीट, डेयरी प्रोडक्ट‍ और मिल्क एक्सपोर्ट की बड़ी रुकावट है. जब तक भारत को एफएमडी फ्री जोन का सर्टिफिकेट नहीं मिलता तो तीनों चीजों का एक्सपोर्ट भी नहीं बढ़ेगा. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 18, 2026,
  • Updated Feb 18, 2026, 3:49 PM IST

पशु छोटा हो या बड़ा,जिसके खुर खुले हुए हैं या खुर के बीच में गैप है तो उन्हें जानलेवा खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी होने की संभावना रहती है. गाय-भैंस, भेड़-बकरियों की ये ऐसी बीमारी है जिससे विश्व के लगभग सभी देश परेशान हैं. ये संक्रमण वाली बीमारी है. पहले माना जाता था कि ये खासतौर पर बरसात के दिनों में होती है. लेकिन अब देखा जा रहा है कि पशु कभी भी एफएमडी से पीडि़त हो जाते हैं. लेकिन एक अच्छी बात ये भी है कि अब इस बीमारी पर काबू पाया जा रहा है. 

एफएमडी का अभी इलाज नहीं मिला है, लेकिन इसे वैक्सीनेशन की मदद से कंट्रोल किया जा रहा है. एनिमल एक्स्पर्ट का कहना है कि एफएमडी बीमारी पशुओं को कई तरह से प्रभावित करती है. दूध उत्पादन कम होने के साथ ही पशुओं की ग्रोथ रुक जाती है. बांझपन की बीमारी आ जाती है. बैलों में काम करने की क्षमता कम हो जाती है. और बीमारी ज्यादा बढ़ने पर पशु की मौत भी हो जाती है. 

पशुओं में ऐसे पहचानें एफएमडी के लक्षण 

एनिमल एक्सपर्ट कि मानें तो एफएमडी पीड़ित किसी भी पशु जैसे गाय-भैंस, भेड़-बकरी और सूअरों के लक्षण ये हैं कि उन्हें  104 से 106 एफ तक तेज बुखार आएगा. भूख कम हो जाएगी. पशु सुस्त रहने लगता है. मुंह से बहुत ज्यादा लार टपकना शुरू हो जाती है. मुंह में फफोले हो जाते हैं. खासतौर पर जीभ और मसूड़ों पर फफोले बहुत ज्यादा हो जाते हैं. पशु के पैर में खुर के बीच घाव हो जाते हैं, जो अल्सर होता है. गाभिन पशु का गर्भपात हो जाता है. थन में सूजन और पशु में बांझपन की बीमारी आ जाती है. 

एफएमडी फैलने की ये हैं पांच वजह     

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि दूषित चारा और दूषित पानी पीने से पशुओं में एफएमडी रोग जल्दी फैलता है. बरसात के दौरान खासतौर पर पशु खुले में चरने के दौरान दूषित चारा-पानी खा और पी लेते हैं. खुले में पड़ी कुछ सड़ी-गली चीजें खाने से भी होता है. फार्म पर नए आने वाले पशु से भी ये बीमारी लग जाती है. पहले से ही एफएमडी से पीड़ित पशु के साथ रहने से भी हो जाती है. 

ऐसे करें एफएमडी की रोकथाम 

पशुओं में एफएमडी की रोकथाम करना बहुत आसान है. इसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है. सबसे पहले तो अपने पशु का रजिस्ट्रेशन कराएं. उसके कान में ईयर टैग डलवाएं. किसी भी पशु स्वास्थ्य  केन्द्र पर साल में दो बार फ्री लगने वाले एफएमडी के टीके लगवाएं. टीका लगवाने के बाद इस बात का खास ख्याल रखें कि टीका लगने पर 10 से 15 दिन में पशु में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है. इसलिए तब तक पशु का खास ख्याल रखें. बरसात के दौरान पशु के बैठने और खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें. 

एफएमडी हो तो ये काम जरूर करें 

एफएमडी का कोई इलाज तो नहीं है, लेकिन कुछ जरूरी उपाय जरूर अपनाए जा सकते हैं. जैसे पीड़ित पशु को बाकी सभी पशुओं से अलग रखें. मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट सॉल्यूशन से धोएं. इसके अलावा बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का पेस्ट बनाकर उससे पशु के मुंह की सफाई करें. खुर के घावों को पोटेशियम सॉल्यूगशन या बेकिंग सोडा से धोएं. कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं.  

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