Animal Pregnency: गाय-भैंस हीट में भी आएगी और वक्त से बच्चा भी देगी, एक्सपर्ट के ये टिप्स करेंगे मदद 

Animal Pregnency: गाय-भैंस हीट में भी आएगी और वक्त से बच्चा भी देगी, एक्सपर्ट के ये टिप्स करेंगे मदद 

Animal Pregnency पशुओं में बांझपन एक बड़ी परेशानी है, लेकिन पशुपालक अगर थोड़ा सा अलर्ट हो जाए तो गाय-भैंस के बांझपन को दूर किया जा सकता है. वर्ना बांझपन बीमारी पशुपालक के मुनाफे को कम कर देती हैं. गाय-भैंस, भेड़-बकरी जब तक हीट में नहीं आएंगी तो वो बच्चा नहीं देंगी और पशुपालक को मुनाफा बच्चे से ही होता है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 16, 2026,
  • Updated Apr 16, 2026, 2:03 PM IST

पशुपालन में पशु का बच्चा भी उत्पादन है. पशुपालन गाय-भैंस का हो या फिर भेड़-बकरी का सभी के मुनाफे उनका बच्चा शामिल रहता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुपालन के अर्थशास्त्र में बच्चा अहम हिस्सा है. लेकिन पशुपालक को इससे मुनाफा तभी होता है जब पशु वक्त से हीट में आ जाए और तय वक्त पर बच्चा दे दे. लेकिन बीते कुछ वक्त से पशुओं में बांझपन की बीमारी देखी जा रही है. इस बीमारी का सीधा असर पशु उत्पादन की लागत पर पड़ता है. लेकिन कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर बांझपन की बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है. 

कई एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी भी इस पर अपनी एडवाइजरी जारी कर चुकी हैं. क्योंकि इस परेशानी के चलते पशुपालकों को खासा नुकसान उठाना पड़ता है. एक्सपर्ट की मानें तो दो से ढाई साल की भैंस भी उतना ही खाती है जितना दूध देने वाली भैंस. गाय-भैंस का वक्त से हीट में आना पशुपालक के मुनाफे के लिए बहुत जरूरी होता है. अगर भैंस दो से ढाई साल की होने के बाद भी हीट में ना आए तो फौरन ही पशु चिकित्सक की सलाह लेकर उसका इलाज शुरू करा दें.

वक्त से इलाज ही है बांझपन की दवा  

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि बांझपन से जुड़े विषय एडवांस्ड इनसाइट्स ऑन थेरियोजेनोलॉजी टू अमेलियोरेट रिप्रोडक्टिव हेल्थ ऑफ डोमेस्टिक एनिमल्स" पर पशुपालकों के लिए जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं. इस कार्यक्रम के तहत पशुपालकों को हम सबसे पहले यह बताते हैं कि अगर वो चाहते हैं कि उनके पशुओं में बांझपन की परेशानी ना हो तो उन्हें सबसे पहला काम यह करना है कि वो बांझपन का इलाज कराने में देरी न करें.

क्योंकि बांझपन जितना पुराना होगा तो उसके इलाज में उतनी ही परेशानी और बढ़ आएगी. इसलिए सही समय पर पशुओं की जांच कराते रहें. अगर भैंस दो से ढाई साल की हो जाए और हीट में नहीं आए तो ऐसे में ज्यादा से ज्यादा दो से तीन महीने तक ही इंतजार करें. अगर फिर भी भैंस हीट में नहीं आती है तो फौरन अपने पशु की जांच कराएं. इसी तरह से गाय के साथ है. अगर गाय डेढ़ साल में हीट पर न आए तो उसे भी दो-तीन महीने इंजार के बाद डॉक्टर से सलाह लें. 

गाय-भैंस के पहला बच्चा होने पर हो जाएं अलर्ट 

एक्सपर्ट का कहना है कि कई बार ऐसा भी होता है कि एक बार बच्चा देने के बाद भी पशुओं में बांझपन की शिकायत आती है. इसलिए अगर गाय-भैंस एक बार बच्चा देती है तो दोबारा उसे गाभिन कराने में देरी न करें. आमतौर पर पहली ब्यात के बाद दो महीने का अंतर रखा जाता है. लेकिन इस अंतर को ज्यादा ना रखें. अंतर जितना ज्यादा रखा जाएगा बांझपन की परेशानी बढ़ने की संभावना उतनी ही ज्यादा हो सकती है.  

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