
गर्मियां शुरू होते ही पशुपालकों की परेशानी बढ़ जाती है. बीमारियों के अलावा सबसे बड़ी परेशानी है दूध उत्पादन का कम होना. एनिमल एक्सपर्ट दूध उत्पादन कम होने की सबसे बड़ी वजह पशुओं को पोषक खुराक का न मिलना. और पोषक खुराक तब बनती है जब पशु की जरूरत और उसके उत्पादन को देखते हुए उसमे हर एक चीज को शामिल किया जाए. लेकिन गर्मियों में सबसे ज्यादा किल्लत हरे चारे की होती है. हरा चारा बाजार में कम हो जाता है. कमी के चलते दाम भी बढ़ जाते हैं.
जबकि एक्सपर्ट की मानें तो दूध-मीट हो या बच्चा तीनों का ही उत्पादन तभी अच्छा मिलेगा जब गाय-भैंस की ग्रोथ अच्छी होगी. और अच्छी ग्रोथ बनती है बैलेंस डाइट से. बैलेंस डाइट पशुओं के लिए क्यों जरूरी है इसे लेकर लगातार एडवाइजरी भी जारी होती रहती हैं. बैलेंस डाइट होती क्या है. कैसे उत्पादन करने वाले पशुओं को बैलेंस डाइट खिलाई जा सकती है. दिनभर के लिए कैसे बैलेंस डाइट का इंतजाम किया जा सकता है. इन्हीं सब सवालों के बारे में इस खबर में बताया जा रहा है.
चारा एक्सपर्ट का कहना है कि हमेशा से चारा उत्पादन के दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि किस चारा फसल के साथ कौनसी फसल लगानी है. साथ ही किन दो फसलों के बीच कितना अंतर रखना है. किस हरे चारे के साथ कौनसा हरा चारा मिलाकर खिलाया जाए. सूखा चारा कैसे तैयार किया जाए, सिर्फ इस बात का ख्याल रखने से ही बैलेंस डाइट तैयार हो जाती है.
एनिमल न्यूट्रीशन एक्सपर्ट का कहना है कि गाय-भैंस को हेल्दी रखने, ज्यादा और अच्छा उत्पादन लेने के लिए पशुओं को बैलेंस डाइट खिलाना बहुत जरूरी है. क्योंकि बैलेंस डाइट के तहत जब हम हरा चारा पशुओं को खिलाते हैं तो वो उनके पाचन को बढ़ावा देता है. वहीं जब सूखा चारा खिलाते हैं तो खराब मौसम के दौरान पशुओं को एनर्जी देता है. वहीं पोषण की कमी होने पर साइलेज भरोसेमंद पोषण देने वाला चारा साबित होता है. ऐसे ही जब हम पशुओं की खुराक में मिनरल मिक्चर शामिल करते हैं तो उन्हें पूर्ण पोषण मिलना तय हो जाता है, जिससे पशुओं की ग्रोथ में मदद मिलती है.
एक्सपर्ट का कहना है कि नेपियर घास बहुवर्षिय चारे में शामिल है. बहुवर्षिय चारा वो होता है जो एक बार लगाने के बाद लम्बे वक्त तक फसल देता है. अगर आप एक बार नेपियर घास लगाते हैं तो उससे पांच साल तक लगातार हरा चारा ले सकते हैं. लेकिन एनीमल एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं को सिर्फ एक ही तरह के हरे चारे पर नहीं रखा जा सकता है. जैसे अगर पशु को नेपियर घास दे रहे हैं तो उसके साथ दलहनी चारा भी मिला लें. सितम्बर में नेपियर घास के साथ लोबिया उगाया जा सकता है. क्योंकि नेपियर घास में कर्बोहाइड्रेट होता है तो लोबिया में प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स शामिल होते हैं.
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