Animal Care in Summer: बरसात ही नहीं गर्मियों में भी गाय-भैंस के लिए जानलेवा है बबेसियोसिस बीमारी

Animal Care in Summer: बरसात ही नहीं गर्मियों में भी गाय-भैंस के लिए जानलेवा है बबेसियोसिस बीमारी

Animal Care in Summer पैरासाइट पशुओं के खून में चिचड़ियों के माध्यम से प्रवेश करते हैं और रक्त में जाकर लाल रक्त कोशिकाओं में अपनी संख्या बढ़ाने लगते है. इसी वजह से शरीर का हीमोग्लोबिन पेशाब के साथ बाहर निकलने लगता है. एक्सपर्ट के मुताबिक पालतू पशुओं के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले मुख्य ब्लड पैरासाइट बबेसियोसिस और चिलेरियोसिस होते हैं. 

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 25, 2026,
  • Updated Feb 25, 2026, 2:56 PM IST

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो गाय-भैंस में होने वाली ज्यादा छोटी-बड़ी बीमारियां उनकी देखभाल और साफ-सफाई से जुड़ी हुई होती हैं. अगर गाय-भैंस और उनको रखे जाने वाले बाड़े (शेड) की हर रोज अच्छे से सफाई की जाए तो काफी हद तक बीमारियां होंगी ही नहीं. और ये भी हकीकत है कि पशुपालन में पशुपालकों से सबसे ज्यादा लापरवाही साफ-सफाई के मामले में ही होती है. और इसी का नतीजा है कि मौसम कोई भी हो, पशु बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं. ऐसे में ये बात गलत साबित होती है कि बरसात के दिनों में ही सबसे ज्यादा बीमारियां पशुओं को होती हैं. ऐसी ही एक बीमारी है बबेसियोसिस. एक्सपर्ट का कहना है कि ये बीमारी आमतौर पर गर्मियों और बरसात में होती है. 

इसकी वजह ये है कि जिस पैरासाइट से बबेसियोसिस बीमारी होती है वो सबसे ज्यादा गर्म मौसम और नमी वाले बरसात के दिनों में होती है. इस पैरासाइट के चलते पशुओं में खून की कमी होने लगती है. वहीं दूध उत्पादन घट जाता है. ऐसे में अगर वक्त रहते इस बीमारी के लक्षणों को नहीं पहचाना गया, वक्त से पशु का इलाज शुरू नहीं हुआ तो कई बार पशु की मौत तक हो जाती है.

गाय-भैंस में होने वाली किलनियां और चीचड़ हर एक पशुपालक के लिए बड़ी परेशानी होती है. बबेसियोसिस बीमारी की वजह भी यही हैं. बबेसियोसिस की प्रजातियों में बबेसिया बोविस, बबेसिया मेजर, बबेसिया बाइजेमिया और बबेसिया डाईवरजेन्स शामिल हैं. इस बीमारी की वजह से पशु का दूध उत्पादन का घटना, ग्रोथ में कमी का होना आम बात है. 

ये हैं पशुओं में बबेसियोसिस के लक्षण

  • बबेसियोसिस के चलते पशु खाना-पीना छोड देता है. 
  • बबेसियोसिस की वजह से ही दूध उत्पादन घट जाता है. 
  • बबेसियोसिस से पीडि़त पशु को तेज बुखार आ जाता है.
  • खून की कमी, हदय की धड़कन बढ़ना और पीलिया हो जाता है. 
  • पीडि़त पशु लाल या फिर ब्रॉउन कलर का पेशाब करता है. 
  • बबेसियोसिस पीडि़त पशु को खूनी दस्त की शि‍कायत हो जाती है. 
  • बीमारी बढ़ने पर वक्त से इलाज नहीं मिले तो 90 फीसद केस में पशु की मौत हो जाती है. 

बबेसियोसिस होने पर ऐसे करें इलाज

बबेसियोसिस संक्रमित पशु के लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू कराएं.
अपने क्षेत्र में किलनियों-चिचढ़ो के प्रसार को रोकने के बारे में जागरुकता फैलाएं.
जो भी पशु थोड़ा भी बीमार दिखें तो उनके खून की जांच कराएं. 
पशुचिकित्सक की सलाह से डाईमिनेजीन, एसीट्‌यूरेट, ऑक्सीट्टासाइक्लिन एंटीबायोटिक और खून बढ़ाने वाली दवाई देनी चाहिए.

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