
पानी की कमी के इंसानों में भी बड़े खतरे हैं. उसी तरह से पशुओं में भी पानी की कमी के चलते बहुत सारे नुकसान उठाने पड़ते हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो गर्मियों में पानी की कमी के चलते पशुओं में हीट स्ट्रैस और डिहाइड्रेशन जैसी परेशानियां होने लगती हैं. कई बार ये छोटी-छोटी सी दिखने वाली परेशानियां पशुओं के लिए जानलेवा हो जाती हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि पशु जब हीट स्ट्रैस में आता है तो उसके शरीर में पानी की कमी होने लगती है. पानी की कमी से ही डिहाइड्रेशन की परेशानी हो जाती है.
हालांकि पशुओं को गर्मियों में कितना पानी पीने के लिए देना चाहिए ये मानक तय है, लेकिन, फिर भी अनजाने में या लापरवाही के चलते कई बार पशुओं को जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल पाता है. ऐसे हालात में हरा चारा भी पशुओं में पानी की कमी को पूरा करता है. लेकिन, अगर पानी के साथ हरा चारा थोड़ा सा भी ज्यादा हो गया तो पशुओं को पेट संबंधी अफरा जैसी बीमारी हो जाती हैं.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि दूध देने वाली गाय और भैंस के लिए पानी की खूब जरूरत होती है. क्योंकि पानी की कमी का असर दूध उत्पादन पर भी पड़ता है. गाय अगर दूध दे रही है तो दिनभर में उसे कम से कम 30 से 50 लीटर पानी पीने के लिए चाहिए. वहीं अगर भैंस दूध दे रही है तो उसे दिनभर में 40 से 70 लीटर पानी की जरूरत होती है. गर्मियों में जमीन से निकला सामान्य पानी पिलाना चाहिए. नल की सप्लाई वाला पानी है तो वो गर्म नहीं होना चाहिए. करना तो ये चाहिए साफ हौज या बर्तन में सामान्य तापमान वाला पानी पशु के सामने ही रख देना चाहिए, जिससे जब भी उसे प्यास लगे तो वो जरूरत के हिसाब से पी ले.
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