Tuna Fish: सीफूड एक्सपोर्ट बढ़ाने को इसलिए बार-बार हो रही टूना मछली की चर्चा  

Tuna Fish: सीफूड एक्सपोर्ट बढ़ाने को इसलिए बार-बार हो रही टूना मछली की चर्चा  

Tuna Fish सीफूड एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए अंडमान-निकोबार द्वीप समूह टूना मछली का क्लस्टर घोषि‍त हो चुका है. टूना के साथ ही यहां कुछ और भी ऐसी मछलियां हैं जिनकी मार्केट में डिमांड है. मछलियों के इसी भंडार का फायदा उठाने, खाने वालों की डिमांड को पूरा करने और मछुआरों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए सीफूड हब बनाने की तैयारी चल रही है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 14, 2026,
  • Updated Apr 14, 2026, 2:20 PM IST

भारत का सीफूड एक्सपोर्ट 68 हजार करोड़ रुपये का हो चुका है. हाल ही में इसमे 6 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. लेकिन केन्द्र सरकार का मकसद इस आंकड़े को एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है. इसके लिए सरकार जहां रेडी टू ईट और रेडी टू कुक की बात कर रही है, वहीं टूना मछली भी सरकार के प्लान में शामिल है. यहां तक की फिशरीज से जुड़े हर एक कार्यक्रम में सरकार टूना मछली के बारे में बात करना नहीं भूलती है. ये इसलिए भी है कि एक-दो को छोड़ दें तो ऐसा कोई देश नहीं है जहां टूना मछली खाई न जाती हो. 

फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो बाजार में टूना की कीमत 150 से 400-500 रुपये किलो तक है. टूना की एक प्रजाति ऐसी भी है की जो लाखों रुपये किलो की कीमत से बिकती है. हालांकि लाखों की कीमत और एक से 15 फुट तक के साइज में पाई जाने वाली इस टूना फिश को पकड़ने पर रोक है. हालांकि सस्ती टूना को पसंद करने वालों की संख्या भी कम नहीं है. 

इसलिए बहुत पसंद की जाती है टूना 

कहा जाता है कि दूसरी मछलियों के मुकाबले टूना मछली तैरने में बहुत तेज होती है. इतना ही नहीं टूना मछली खाने के फायदे भी बहुत हैं. अगर हड्डियों के हिसाब से बात करें तो टूना में कैल्शियम, विटामिन-डी और मैग्नीशियम बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है. इसलिए टूना खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं. टूना में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा भी खूब होती है तो ये हॉर्ट को भी मजबूत करता है. आंखों को हेल्दी रखने और वजन घटाने के लिए भी टूना मछली फायदेमंद बताई जाती है. 

देश के इस इलाके में हैं 4 वैराइटी की टूना 

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को टूना मछली का बैंक भी कहा जाता है. यहां बड़ी मात्रा में टूना मछली पाई जाती है. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो यहां खासतौर पर येलोफिन टूना, स्किपजैक टूना, बिग आई टूना और नेरिटिक टूना पाई जाती है. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि भारतीय टूना मछली को इंटरनेशनल मार्केट में वो दाम नहीं मिल पाते हैं जो दूसरे देशों की टूना को मिलते हैं. टूना क्योंकि गहरे समुद्र में पकड़ी जाती है और बाजार तक आते-आते काफी वक्त लग जाता है, जिसका असर इसकी क्वालिटी पर पड़ने लगता है. 

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