
डेयरी-पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर में उत्पादन बढ़ाने के लिए फीड इस्तेमाल किया जाता है. अगर पोल्ट्री सेक्टर की बात करें तो फीड में एनर्जी और प्रोटीन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. यही वजह है कि फीड में सबसे ज्यादा मक्का और सोयामील इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि ये महंगा पड़ता है और लागत को बढ़ा देता है. हालांकि एक्सपर्ट के मुताबिक डीडीजीएस (Distillers Dried Grains with Solubles) इस लागत को कम कर सकता है. डिस्टिलरी में मक्का, गेहूं, चावल और सोया आदि से बनने वाले इथेनॉल में से डीडीजीएस का उत्पादन होता है.
फीड एक्सपर्ट के मुताबिक डेयरी-पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर में कुल फीड खपत का 10 फीसद तक इस्तेमाल किया जा सकता है. कुल डीडीजीएस उत्पादन का 50 फीसद से ज्यादा हिस्सा लाइव स्टॉक में इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है. क्योंकि खासतौर पर पोल्ट्री सेक्टर को मानकों के मुताबिक डीडीजीएस नहीं मिल पा रहा है. खासतौर पर मक्का से बना डीडीजीएस पोल्ट्री में नहीं जा रहा है. अभी जो भी डीडीजीएस इस्तेमाल हो रहा है वो डेयरी में ही ज्यादा है.
कंपाउंड फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) के प्रेसिडेंट दिव्य कुमार गुलाटी ने किसान तक को बताया कि हम अगर डेयरी-पोल्ट्री और फिशरीज में 10 फीसद भी डीडीजीएस इस्तेमाल करते हैं तो हमे हर साल करीब 20 लाख टन डीडीजीएस की जरूरत होगी. इसमे मक्का से बना डीडीजीएस भी होगा तो चावल से बना हुआ डीडीजीएस भी. हालांकि अभी थोड़ा बहुत डीडीजीएस डेयरी में इस्तेमाल हो रहा है.
वहीं बहुत थोड़ी मात्रा में चावल से बना डीडीजीएस पोल्ट्री में इस्तेमाल किया जाता है. कम मात्रा में डीडीजीएस इस्तेमाल होने की बड़ी वजह उसका मानकों के मुताबिक उत्पादन नहीं होना है. अगर बात पोल्ट्री की करें तो डीडीजीएस किसी से भी बना हो, लेकिन एफ्लाटॉक्सिन के मामले में मानकों के मुताबिक डीडीजीएस 20 पीपीबी वाला होना चाहिए. नमी को कंट्रोल किया जाए.
बीते कुछ वक्त पहले यूपी डिस्टिलर्स एसोसिएशन और पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) के बीच एक बैठक हुई थी. बैठक के दौरान पीएफआई ने पोल्ट्री में डीडीजीएस इस्तेमाल करने पर अपनी सहमति दी थी. लेकिन इसके साथ ही उनकी कुछ डिमांड भी थी. पीएफआई की ओर से बैठक में प्रेसिडेंट रनपाल ढांढा शामिल हुए थे. उनका कहना था कि मक्का पोल्ट्री फीड का अहम हिस्सा है. अगर डीडीजीएस को पोल्ट्री फीड में शामिल किया जाता है तो उसके लिए कुछ मानक है.
उन मानक को पूरा करने पर ही इसका इस्तेमाल करने से फायदा होगा. जैसे एफ्लाटॉक्सिन का लेवल 20 पीपीबी से कम होना चाहिए. वहीं नमी का लेवल भी 12 फीसद से कम ही होना चाहिए. अगर ये मानक पूरे किए जाते हैं तो फिर डीडीजीएस को इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है. क्योंकि पोल्ट्री प्रोडक्ट अंडे-चिकन की क्वालिटी को बनाए रखना भी हमारा ही काम है.
ये भी पढ़ें- PDFA Expo: इनाम में ट्रैक्टर-बुलैट जीतने से पहले गाय-भैंसों को कराना होगा डोप टेस्ट
Economic Survey: कृषि क्षेत्र की धीमी चाल, डेयरी-पोल्ट्री और मछली पालन ने कैसे ली ऊंची उड़ान?