Egg Rate: चिकन-अंडे के दाम में भारी गिरावट, लागत भी नहीं निकाल पा रहे पोल्ट्री किसान

Egg Rate: चिकन-अंडे के दाम में भारी गिरावट, लागत भी नहीं निकाल पा रहे पोल्ट्री किसान

करनाल के पोल्ट्री किसानों पर आजकल दोहरी मार पड़ रही है. एक तरफ गर्मी बढ़ने से चिकन और अंडे के भाव में बड़ी गिरावट है जबकि दूसरी ओर चूजों की मृत्यु दर बढ़ गई है. अगले महीने से सावन भी शुरू हो रहा है जिसमें चिकन और अंडे की बिक्री गिर जाती है. ऐसे में पोल्ट्री किसान अपनी लागत को लेकर परेशान हैं.

चिकन और अंडे दाम गिरने से पोल्ट्री किसान परेशानचिकन और अंडे दाम गिरने से पोल्ट्री किसान परेशान
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 28, 2023,
  • Updated Jun 28, 2023, 1:33 PM IST

करनाल के पोल्ट्री किसान आजकल बहुत परेशान हैं. उनकी परेशानी इसलिए बढ़ गई है क्योंकि अभी वे दोहरी मार झेल रहे हैं. एक तरफ उन्हें मुर्गियों के सही दाम नहीं मिल रहे, जबकि दूसरी ओर चूजों के मरने की दर बढ़ गई है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि बढ़ती गर्मी ने मुर्गियों को बेहाल कर रखा है. करनाल के पोल्ट्री किसान कहते हैं कि बेतहाशा गर्मी से चूजों के मरने की दर (मृत्यु दर) 15 से 20 परसेंट तक बढ़ गई है. इससे पोल्ट्री किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. जो चूजे मुर्गियों में तब्दील होते और जिन्हें बेचकर कमाई की जाती, वे चूजे गर्मी से मर रहे हैं. इससे पोल्ट्री किसानों की कमाई प्रभावित हो रही है. गर्मी की वजह से अंडे और चिकन का उत्पादन 20 से 25 परसेंट तक गिर गया है.

अगले महीने चार जुलाई से सावन का महीना शुरू हो रहा है. हिंदुओं के लिए यह सबसे पवित्र महीना होता है जिस दौरान शिवभक्त कांवड़ निकालते हैं. इस पवित्र महीने में लोग मांसाहार और अंडे के सेवन से परहेज करते हैं. इसलिए आने वाले दिनों में चिकन और अंडे के दाम और गिरेंगे. लेकिन उससे पहले ही पोल्ट्री किसान परेशानी में आ गए हैं. सावन से पहले ही गर्मी की वजह से मुर्गियों के दाम गिर गए हैं. 

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क्या है किसानों की परेशानी?

“प्रत्येक ब्रॉयलर चूजे की औसत उत्पादन लागत 20-25 रुपये है, लेकिन इसे 04-05 रुपये प्रति चूजा बेचा जा रहा है. इनपुट लागत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, जिससे हैचरी मालिकों को नुकसान हो रहा है, ”करनाल जिले के हैचरी मालिक वीरेंद्र चौधरी ने 'दि ट्रिब्यून' से कहा.

मुर्गी पालने वाले किसान यशपाल कंबोज ने कहा कि दो मुख्य मुर्गी आहार मक्का और सोया की लागत में वृद्धि के कारण चूजे को पालने की लागत भी बढ़ गई है. मक्का 2,000 रुपये प्रति क्विंटल और सोया 4,300-4,500 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा जा रहा है. आम तौर पर तीन से 3.5 किलोग्राम चारा चूजे को 35-40 दिनों में दो किलोग्राम वजन का चिकन बनने में मदद करता है. फिलहाल एक चिकन 75-80 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि औसत कीमत 85 से 90 रुपये प्रति किलो के बीच है.

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गर्मी बढ़ने से चिकन की मांग गिरी

गर्मी बढ़ने के कारण चिकन की मांग में कमी आई है और अगले महीने तक यह और कम हो जाएगी क्योंकि सावन के महीने में कई राज्यों ने चिकन की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है. मध्य हरियाणा पोल्ट्री फार्मर्स एसोसिएशन के सचिव और राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति, दिल्ली क्षेत्र के अध्यक्ष सुरिंदर भूटानी ने कहा कि पोल्ट्री उद्योग हर दिन लगभग 3.5 करोड़ अंडे और 150 टन चिकन का उत्पादन करता है. लेकिन अभी इसमें कमी देखी जा रही है क्योंकि गर्मी बढ़ने से चूजे मर रहे हैं. अंडे का उत्पादन भी पहले से घट गया है.

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