सूखे का खतराकर्नाटक में इस साल संभावित सूखे को लेकर राज्य सरकार अलर्ट मोड में आ गई है. सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि केंद्र सरकार से मिले संकेतों के बाद राज्य सरकार ने संभावित गंभीर सूखे से निपटने की पूरी तैयारी कर ली है. उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे जल्दबाजी में फसलों बुवाई न करें और बारिश और जलाशयों में उपलब्ध पानी की स्थिति को देखकर ही फसल लगाने का फैसला लें. उनका कहना है कि अगर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है.
CM डी.के. शिवकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस साल गंभीर सूखे की आशंका जताई गई है. ऐसे समय में सभी को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर संभव कदम उठा रही है ताकि किसानों और आम लोगों को परेशानी कम से कम हो.
CM डी.के. शिवकुमार ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार राज्य के प्रमुख बांधों में पानी की आवक बेहद कम है. तुंगभद्रा, घटप्रभा, मलप्रभा, नारायणपुरा और वाणीविलास जैसे प्रमुख जलाशयों में पानी का प्रवाह लगभग शून्य है. वहीं, कावेरी बेसिन में भी सामान्य से कम बारिश हुई है. ऐसे में आने वाले दिनों में जल संकट और गहरा सकता है. उन्होंने किसानों से कहा कि वे केवल जलाशयों के पानी पर भरोसा करके खेती की योजना न बनाएं. यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है, तभी सरकार सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की स्थिति में होगी, इसलिए किसानों को मौसम की स्थिति को देखते हुए ही फसलों का चयन करें.
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने किसानों को सलाह दी है कि जब तक जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं भर जाता, तब तक अधिक पानी की जरूरत वाली फसलें लगाने से बचें. उन्होंने कहा कि खेती से जुड़े सभी फैसले मॉनसून की सक्रियता और पानी की वास्तविक उपलब्धता को ध्यान में रखकर ही लें. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं होगा, तो सरकार सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ पाएगी, इसलिए किसानों को जोखिम कम करने के लिए कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की ओर ध्यान देना चाहिए.
संभावित सूखे से निपटने के लिए राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों को जरूरी निर्देश दिए हैं. ऊर्जा विभाग को बिजली आपूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए कहा गया है. वहीं, जिला मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पीने के पानी, पशुओं के लिए चारे और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा जहां जरूरत होगी, वहां नए बोरवेल खोदने का काम भी तेज किया जाएगा, ताकि पेयजल संकट से बचा जा सके. सरकार ने अलग-अलग मंत्रियों को दो से तीन जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि डी.के. शिवकुमार खुद राज्य के चारों प्रशासनिक डिवीजनों का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा करेंगे.
सीएम ने कहा कि सरकार पूरी गंभीरता के साथ स्थिति पर नजर रख रही है, लेकिन इस चुनौती से निपटने के लिए किसानों और आम लोगों का सहयोग भी जरूरी है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मौसम और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ही खेती की योजना बनाएं. यदि समय पर अच्छी बारिश होती है, तो सरकार सिंचाई के लिए आवश्यक पानी उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास करेगी. सरकार का उद्देश्य है कि सूखे की स्थिति में भी किसानों को कम से कम नुकसान हो और राज्य में पेयजल और कृषि व्यवस्था सुचारू बनी रहे.
बता दें कि कर्नाटक में संभावित जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने पीने के पानी की व्यवस्था के लिए 117 करोड़ रुपये अग्रिम जारी किए हैं. ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने बताया कि अल नीनो के कारण कम बारिश की आशंका को देखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा कि 85 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें से अब तक करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. पानी की कमी वाले गांवों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. मंत्री ने लोगों से पानी का सोच-समझकर उपयोग करने और उसकी बर्बादी रोकने की भी अपील की.
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