अल नीनो पर आया नया अपडेट (AI Image)दुनियाभर की मौसम एजेंसियों की निगाहें इस समय प्रशांत महासागर पर टिकी हुई हैं, जहां तेजी से बढ़ती गर्मी ने अल नीनो की वापसी के संकेत मजबूत कर दिए हैं. फिलहाल ENSO यानी एल नीनो सदर्न ऑसिलेशन की स्थिति न्यूट्रल बनी हुई है, लेकिन समुद्र की सतह और उसके नीचे का तापमान लगातार बढ़ रहा है. इससे आने वाले महीनों में अल नीनो बनने की आशंका बढ़ गई है. ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी ‘द ब्यूरो ऑफ मिटीरियोलॉजी’ (BoM) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर क्लाइमेट मॉडल बता रहे हैं कि जून तक समुद्र की सतह का तापमान अल नीनो की तय सीमा को पार कर सकता है.
हालांकि, अभी तक हवा के दबाव, बादलों के पैटर्न और ट्रेड विंड जैसी वायुमंडलीय परिस्थितियां पूरी तरह अल नीनो जैसी नहीं बनी हैं, लेकिन उनका रुझान उसी दिशा में जा रहा है. बिजनेसलाइन के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो कितना मजबूत होगा, इसको लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है. कई मॉडल मध्यम स्तर का अल नीनो बनने की संभावना जता रहे हैं, जबकि कुछ संकेत मजबूत अल नीनो की तरफ भी इशारा कर रहे हैं. खासतौर पर मध्य प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्मी मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रही है.
मालूम हो कि भारत के लिए अल नीनो हमेशा चिंता का कारण माना जाता है, क्योंकि इसकी उपस्थिति के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ता है. पहले भी कई बार अल नीनो के कारण मानसून की एंट्री में देरी, कम बारिश और लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बने हैं. इस बार भी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सामान्य से कमजोर मॉनसून का अनुमान जताया है. IMD के अनुसार, इस साल बारिश लंबी अवधि के औसत का करीब 92 प्रतिशत रह सकती है.
हाल ही में मौसम विभाग ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की गति कमजोर पड़ी है. इसके अलावा अरब सागर में बन रही संभावित मौसमी प्रणाली के कारण केरल तट पर मॉनसून की दस्तक में देरी भी हो सकती है. पहले 4 दिन आगे या पीछे रहने के साथ मॉनसून के 26 मई तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था.
बात दें कि साल 2023 में जून के दौरान अल नीनो बना था और यह करीब 11 महीने तक बना रहा था, जिसका इसका असर भारत के मॉनसून पर भी पड़ा था. उसी का प्रभाव 2024 तक देखने को मिला, जिसे रिकॉर्ड पर सबसे गर्म सालों में गिना गया. उस दौरान धान और दलहन जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हुई थी और खाद्य महंगाई भी बढ़ी थी.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय है. आने वाले दिनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है. इससे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में तेज पश्चिमी हवाएं बन सकती हैं, जो समुद्र को और गर्म करेंगी. इससे अल नीनो बनने की प्रक्रिया को और मजबूती मिल सकती है.
इंडियन ओशन डाइपोल यानी IOD की स्थिति अभी न्यूट्रल बनी हुई है. 24 मई 2026 तक इसका इंडेक्स -0.34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि शुरुआती सर्दियों तक IOD सामान्य रह सकता है, लेकिन सितंबर के आसपास पॉजिटिव IOD बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के आसपास कई समुद्री इलाकों में पानी का तापमान सामान्य से ज्यादा बना हुआ है. खासतौर पर दक्षिण-पूर्वी हिस्सों और तटीय क्षेत्रों में समुद्री सतह 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म दर्ज की गई है. वैज्ञानिक मान रहे हैं कि समुद्र की यही अतिरिक्त गर्मी आने वाले मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकती है.
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