देश के कुछ राज्यों में अल-नीनो का बुरा प्रभाव पड़ सकता है. कम बारिश से सूखे की आशंका है. (Photo: ITG)दुनिया के मौसम पर बड़ा असर डालने वाला अल नीनो (El Nino) एक बार फिर तेजी से मजबूत होता नजर आ रहा है. अमेरिका की मौसम वैज्ञानिक एजेंसी NOAA (नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन) और विश्व मौसम संगठन (WMO) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यह इस साल “बहुत मजबूत” (Very Strong) स्तर तक पहुंच सकता है.
NOAA की रिपोर्ट के अनुसार, उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर (Tropical Pacific Ocean) में समुद्र के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और अल नीनो के बनने की स्थिति स्पष्ट हो चुकी है. एजेंसी ने अल नीनो एडवाइजरी भी जारी कर दी है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल के अंत तक इसकी तेजी मध्यम से मजबूत स्तर तक जा सकती है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 63% संभावना है कि समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2.0 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाए. अगर ऐसा होता है, तो NOAA इसे “बहुत मजबूत अल नीनो” घोषित करेगा.
अल नीनो दरअसल अल नीनो सदर्न ऑस्सिलेशन (ENSO) का गर्म फेज है. जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से का तापमान लगातार कई महीनों तक औसत से कम से कम 0.5°C अधिक हो जाता है, तब इसे अल नीनो माना जाता है. इस दौरान समुद्र की गर्म धाराएं दक्षिण अमेरिका की ओर बढ़ती हैं और सामान्य वायुमंडलीय प्रणाली (Walker Circulation) कमजोर पड़ जाती है, जिससे दुनियाभर में मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है.
विश्व मौसम संगठन (WMO) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि जून से अगस्त 2026 के बीच अल नीनो बनने की 80% संभावना है, जबकि नवंबर तक इसके बने रहने की 90% तक संभावना जताई गई है. WMO के मुताबिक, महासागर की सतह के नीचे तापमान सामान्य से 6 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा दर्ज किया गया है, जो आने वाले महीनों में अल नीनो को और मजबूत बना सकता है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी देते हुए कहा, “अल नीनो ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को और बढ़ा देगा. इससे चरम मौसम घटनाएं तेज होंगी और दुनिया के कई हिस्सों में गंभीर असर पड़ेगा.”
अल नीनो के कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम पूरी तरह बदल सकता है. इससे कई क्षेत्रों में सूखा और पानी की कमी, कुछ जगहों पर भारी बारिश और बाढ़ का खतरा, हीटवेव (लू) की घटनाओं में बढ़ोतरी, समुद्र और जमीन दोनों जगह तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि, अटलांटिक महासागर में तूफानों की संख्या कम, जबकि प्रशांत में ज्यादा, मछलियों और समुद्री जीवों के माइग्रेशन पैटर्न में बदलाव और हानिकारक एल्गल ब्लूम (algal bloom) की घटनाएं बढ़ सकती हैं.
वैज्ञानिकों के अनुसार, 2023-24 का अल नीनो पिछले पांच सबसे मजबूत घटनाओं में शामिल रहा था, जिसने 2024 में रिकॉर्ड वैश्विक तापमान बढ़ाने में भूमिका निभाई. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का अल नीनो जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे में समय रहते तैयारी, जागरूकता और जलवायु के प्रति ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है.
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