सब्जी की खेती ने जगाई किसान की आसकोविड-19 महामारी और मणिपुर में लंबे समय तक चले अशांति के कारण वर्षों के झटकों बाद, कुम्बी तेराखा के किसान निंगथौजम इनाओचा को कृषि के माध्यम से एक बार फिर आस जगी है. दरअसल, इस किसान ने राज्य में शांत माहौल होने के बाद अपने एक लोराक यानी 0.0669 हेक्टेयर में सब्जियां उगाते हैं. इनाओचा अपने खेतों में पत्ता गोभी की ग्रीन हीरो किस्म, फूलगोभी, ब्रोकली की क्वीन मैजिक किस्म और सरसों की खेती करते हैं. वे कई वर्षों से जिस स्थानीय सरसों की किस्म पर भरोसा करते आए हैं, उसी का उपयोग करते हैं, जिससे वो सालाना लगभग 20 लाख रुपये की कमाई करते हैं. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
इस मौसम में किसान निंगथौजम इनाओचा ने 3,000 से अधिक सरसों के पौधे उगाए है, जिसमें से से हाल ही में एक दिन उन्होंने 100 गठ्ठे सरसों की कटाई करके बेची है. उन्होंने सभी फसलों की बुवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में की थी. कुल मिलाकर उन्होंने, पत्ता गोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली और सरसों सहित लगभग 18,000 पौधे उगाए गए हैं. हालांकि, अधिकांश फसलें पत्तागोभी की थीं, लेकिन 1,000 से अधिक फूलगोभी के पौधे और 3,500 पौधों के बराबर ब्रोकली के बीज भी बोए थे.
किसान निंगथौजम इनाओचा के अनुसार, एक ही फसल के मौसम में उन्हें 7-8 लाख रुपये की आय होती है. इसके अलावा, वे खरीफ और रबी दोनों मौसमों में भी खेती करते हैं. वो खरीफ के मौसम में कद्दू और अन्य लता वाली सब्जियां उगाते हैं. वहीं, धान की खेती से होने वाली आय को छोड़कर, खेती से उनकी कुल वार्षिक आय लगभग 20 लाख रुपये है.
इनाओचा ने याद किया कि कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें काफी नुकसान हुआ, क्योंकि वे अपनी फसल बेच नहीं पाए थे. साथ ही मणिपुर में जारी अशांति के कारण स्थिति और बिगड़ गई , जिसका असर पिछले साल तक के कृषि गतिविधियों पर पड़ता रहा. उन्होंने कहा कि इस साल वो थोड़ा खुश हैं. उन्हें लगता है कि इस साल वो अच्छी मात्रा में फसल बेच पाएंगे.
इनाओचा का मानना है कि अगर अधिक लोग गहन कृषि तकनीकों को अपनाएं तो मणिपुर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकता है. उन्होंने कहा कि खेती ने उन्हें अपने परिवार के सभी खर्चों को बिना किसी कठिनाई के पूरा करने में सक्षम बनाया है. वे मुख्य रूप से अपने अनुभव और पारंपरिक ज्ञान पर निर्भर रहते हैं, सीमित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करते हैं और अधिकांश जैविक उर्वरकों से परहेज करते हैं. उन्होंने समझाया कि यदि खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए, तो उत्पादन और भी बढ़ सकता है. जैविक खेती से उपज कम होती है, लेकिन लाभ अधिक मिलता है.
कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के लिए, इनाओचा को तीन बार सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार सहित कई अन्य सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कभी बैंक से लोन नहीं लिया, बल्कि केवीके विष्णुपुर से बीज सहायता प्राप्त की. उनके खेत से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है. हालात सुधारने और कृषि गतिविधियों में वृद्धि के साथ, इनाओचा जैसे किसान आशावान हैं कि शांति और उत्पादकता मणिपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को बहाल करने में सहायक होगी. (एएनआई)
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