ब्रांड अंबेसडर बना युवा किसानगोवा सरकार ने धारबंदोरा के डबाल गांव के युवा किसान को राज्य का एग्रीकल्चर ब्रांड एंबेसडर चुना गया है. सरकार ने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि स्वयंपूर्ण गोवा मिशन के तहत सब्जी की खेती में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सके. दरअसल, 32 साल के किसान वरद सामंत को एग्रीकल्चर ब्रांड एंबेसडर बनाने का उद्देश्य राज्य भर के किसानों को टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने और आयातित उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित करना है.
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि युवा किसान सामंत की यात्रा दिखाती है कि जब इनोवेशन, मशीनीकरण और सरकारी मदद मिलती है, तो खेती में कितनी क्षमता है. सीएम ने सामंत से बागवानी विभाग द्वारा खरीदी गई फसलों का जिक्र करते हुए कहा कि हमने उन्हें लगातार तीन सालों तक 65 लाख रुपये, 60 लाख रुपये और 58 लाख रुपये दिए. यह इसलिए नहीं था कि वह बाहर से सब्जियां लाए थे, बल्कि इसलिए कि उन्होंने गोवा में अपनी फसल उगाई.
युवा किसान सामंत का खेती का सफर पहले से प्लान किया हुआ नहीं था. सामंत के पिता किसान थे, लेकिन 2012 में B.Com पूरा करने के बाद भी खेती उनके करियर की लिस्ट में नहीं थी. 2010 और 2014 के बीच उनका परिवार गन्ने की खेती करता था, लेकिन बाद में सामंत ने सब्जी की खेती की संभावनाओं को खोजना शुरू किया.
उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र की यात्रा की, खेती के अच्छे तरीकों का अध्ययन किया और प्रयोग करने के लिए गोवा लौट आए. उन्होंने छोटे पैमाने पर शुरुआत की. सामंत ने शुरू में लगभग 2,000 वर्ग मीटर में भिंडी की खेती की. फसल सफल रही, जिससे उन्हें खीरा, गाजर, पत्ता गोभी और दूसरी सब्जियां उगाने के लिए प्रोत्साहन मिला. सामंत ने कहा कि तभी मुझे एहसास हुआ कि गोवा में सब्जी की खेती करना संभव है.
आज सामंत लगभग 10 एकड़ जमीन पर सब्जियां उगाते हैं, जिसमें पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक मशीनों की सहायता और कुशल खेती के तरीकों के साथ मिलाते हैं. फिलहाल उन्होंने पत्ता गोभी (70 दिन की फसल), गाजर (जो 20 दिनों में तैयार हो जाती है) और तरबूज (जो लगभग 60 दिनों में तैयार हो जाते हैं) वो लगाए हैं.
सामंत ने कहा कि सिर्फ तरबूज की खेती भी फायदेमंद हो सकती है. उन्होंने कहा कि अगर तरबूज 30 रुपये प्रति किलो बिकता है, तो एक किसान सिर्फ 60 दिनों में 20 टन से लगभग 6 लाख रुपये कमा सकता है. वहीं, सामंत सालाना राज्य बागवानी विभाग को 70-80 टन पत्ता गोभी, लगभग 10 टन तक गाजर, भिंडी और दूसरी सब्जियां भी सप्लाई करते हैं, जिसके बाद गोवा राज्य बागवानी निगम अपने वेंडरों के जरिए जनता को ताज़ी सब्जियां और फल सप्लाई करता है. युवा किसान ने बताया कि उन्हें सालाना 50 लाख से 60 लाख रुपये मिलते हैं. जिसमें से मजदूरी और दूसरे खर्चों के बाद भी किसान लगभग 25-30 प्रतिशत का प्रॉफिट कमा सकते हैं.
हालांकि, मुख्यमंत्री ने कहा कि सामंत ने उन्हें बताया कि उनका नेट प्रॉफिट इससे भी ज्यादा था. CM ने कहा मैंने उनसे खर्चों के बाद उनके प्रॉफिट के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि सिर्फ़ सब्जियां उगाकर उन्हें 30 लाख रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ है. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वह 20 से 22 मज़दूरों को काम पर रखते हैं और 60,000 वर्ग मीटर से ज़्यादा ज़मीन पर खेती करते हैं.
खेती को बढ़ावा देने के लिए गोवा के ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किए जाने के बारे में सामंत ने कहा कि उन्होंने कभी इस सम्मान की कल्पना नहीं की थी. उन्होंने कहा कि जब मैंने खेती शुरू की थी, तो मुझे ऐसी किसी भूमिका के बारे में पता नहीं था. मुख्यमंत्री ने हाल ही में मुझसे संपर्क किया और मुझसे गोवा में सब्जी की खेती के बारे में जागरूकता पैदा करने की यह जिम्मेदारी लेने को कहा.
अधिकारियों ने बताया कि CM सावंत ने हाल ही में सामंत के खेतों का दौरा किया था और फसल प्रबंधन और खेती के तरीकों से प्रभावित हुए थे. कृषि निदेशक संदीप फालदेसाई ने कहा कि यह नियुक्ति गोवा को सब्जी की खेती में 'आत्मनिर्भर' बनाने के सरकार के बड़े विज़न में फिट बैठती है. उन्होंने कहा कि गोवा सरकार कृषि विभाग और गोवा राज्य बागवानी निगम के ज़रिए सुनिश्चित बाज़ार वाली सब्जियों को बढ़ावा देने की योजना लागू कर रही है. इस योजना के तहत, हमने सब्जी उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है.
सामंत को युवा किसानों के लिए रोल मॉडल बताते हुए उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री उनके खेत में गए, तो उन्हें लगा कि इस किसान को दूसरों के बीच सब्जी की खेती को बढ़ावा देना चाहिए. इसी के तहत, उन्हें गोवा के सभी तालुकाओं में सेशन, प्रदर्शन और लेक्चर आयोजित करने के लिए ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया है.
वहीं, किसान सामंत ने अपनी ज़्यादातर सफलता का श्रेय सरकारी योजनाओं को दिया, खासकर बागवानी विभाग के ज़रिए मिलने वाले सहायता राशि को. उन्होंने दावा किया कि भिंडी के लिए किसानों को पूरे साल 50 रुपये प्रति किलो मिलते हैं. ऐसी सुनिश्चित कीमत किसी दूसरे राज्य में उपलब्ध नहीं है. उन्होंने कहा कि उनके धारबंदोरा गांव के कई युवाओं ने खेती में दिलचस्पी दिखाई है और अक्सर उनके खेतों में आते हैं. उन्होंने महेश गोनकर और वर्दिकर परिवार के सदस्यों को अपने काम से प्रेरित युवाओं के उदाहरण के तौर पर बताया.
सामंत ने कहा कि यह आम धारणा है कि गोवा में खेती करना संभव नहीं है, लेकिन इस सोच को बदलने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि लगन और सरकारी मदद से किसान सफलतापूर्वक फसल उगा सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं, जिसके पास जमीन और पानी है, वह खेती कर सकता है और आत्मनिर्भर बन सकता है. युवा किसान ने लोगों से खेती की ज़मीनों की रक्षा करने की भी अपील की और चेतावनी दी कि खेती की जमीन के नुकसान से खाद्य सुरक्षा कमजोर होगी. उन्होंने कहा कि 2030 के बाद मशीनों और ऑटोमेटेड खेती की तकनीकों को अपनाने से कृषि क्षेत्र में और भी ज़्यादा मौक़े मिलेंगे. (PTI)
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