मराठवाड़ा में खरीफ फसलों पर मॉनसून की मारमराठवाड़ा का किसान इस साल खरीफ सीजन में बहुत बड़े संकट का सामना कर रहा है. देर से सक्रिय हुआ मॉनसून, सामान्य से काफी कम बारिश, नकली बीजों की शिकायतें, गोगलगाय और इल्ली का बढ़ता प्रकोप, और अब फिर से बारिश का थम जाना... इन सबने किसानों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मराठवाड़ा में खरीफ की कुल 49 लाख 72 हजार 729 हेक्टेयर बुवाई योग्य भूमि है. लेकिन अब तक केवल 29 लाख 53 हजार 203 हेक्टेयर, यानी 59 फीसदी क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है. जबकि 20 लाख 19 हजार 526 हेक्टेयर, यानी 41 फीसदी क्षेत्र अब भी बुवाई का इंतजार कर रहा है.
मराठवाड़ा में इस साल मॉनसून समय पर सक्रिय नहीं हुआ. किसान बारिश का इंतजार करते रहे, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने अब तक बुवाई ही नहीं की. किसानों का कहना है कि खेत में पर्याप्त नमी के बिना बीज डालना मतलब अपनी मेहनत और पैसा दोनों दांव पर लगाना है.
आंकड़े भी हालात की गंभीरता बयां कर रहे हैं. पिछले साल इसी अवधि तक मराठवाड़ा में 44 लाख 67 हजार 357 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी थी, जबकि इस साल यह आंकड़ा घटकर 29 लाख 53 हजार 203 हेक्टेयर पर ही पहुंच पाया है.
बारिश की बात करें तो पिछले साल इसी समय तक 144.30 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि इस साल अब तक केवल 68 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. यानी पिछले साल की तुलना में महज 47 फीसदी बारिश हुई है.
जिलावार स्थिति देखें तो नांदेड़ में सबसे अधिक 74 फीसदी, परभणी में 66 फीसदी, जालना में 65 फीसदी और छत्रपति संभाजीनगर में 62 फीसदी बुवाई हुई है. वहीं बीड में 57 फीसदी, हिंगोली में 56 फीसदी बुवाई हुई है.
सबसे चिंताजनक हालात धाराशिव और लातूर जिले में हैं. धाराशिव में केवल 48 फीसदी बुवाई हुई है, जबकि 52 फीसदी क्षेत्र अब भी खाली पड़ा है. वहीं लातूर में सिर्फ 41 फीसदी बुवाई हो सकी है और 59 फीसदी क्षेत्र में अब तक बुवाई नहीं हुई, जो पूरे मराठवाड़ा में सबसे कम है.
लेकिन जिन किसानों ने हिम्मत करके बुवाई की, उनकी मुश्किलें भी कम नहीं हैं. कई किसानों ने महाबीज समेत 17 कंपनियों के बीजों के अंकुरण नहीं होने की शिकायतें दर्ज कराई हैं. बीज नहीं उगने के कारण अब उनके सामने दोबारा बुवाई का संकट खड़ा हो गया है.
दूसरी ओर जिन खेतों में फसल उग आई है, वहां गोगलगाय और इल्ली का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. किसानों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में गोगलगाय देखी हैं. रात के समय ये गोगलगाय नई उगी फसल को पूरी तरह चट कर रही हैं. और अब फिर से बारिश थम जाने के कारण जो फसल बची है, वह भी सूखने लगी है.
यानी जिन किसानों ने बुवाई नहीं की, वे बारिश का इंतजार कर रहे हैं. जिन्होंने बुवाई की, वे नकली बीजों से परेशान हैं. और जिनकी फसल उग आई, वे अब गोगलगाय, कीटों और बारिश की कमी से उसे बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं.
अब मराठवाड़ा के लाखों किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं. अगर आने वाले दिनों में अच्छी और लगातार बारिश हुई, तो खरीफ की फसल को नई जिंदगी मिल सकती है. लेकिन अगर बारिश ने फिर साथ नहीं दिया, तो दोबारा बुवाई, बढ़ता कर्ज और आर्थिक संकट किसानों की मुश्किलों को और गहरा कर देगा.
ऐसे में किसान सरकार से नकली बीज बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई, दोबारा बुवाई के लिए आर्थिक सहायता, फसल नुकसान का तत्काल सर्वे, उचित मुआवजा और कीट नियंत्रण के लिए तत्काल मदद की मांग कर रहे हैं.
मराठवाड़ा के खेतों से आज सिर्फ एक ही आवाज उठ रही है—"बारिश हो जाए... फसल बच जाए... और किसान की उम्मीदें फिर से हरी हो जाएं."
छत्रपति संभाजीनगर
जालना
बीड
धाराशिव
लातूर
नांदेड़
परभणी
हिंगोली
सबसे अधिक बुवाई: नांदेड़ – 74%
सबसे कम बुवाई: लातूर – 41%
50 प्रतिशत से कम बुवाई वाले जिले:
लातूर – 41%
धाराशिव – 48%
50 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र अब भी बिना बुवाई वाले जिले:
लातूर – 59%
धाराशिव – 52%
यह आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि मराठवाड़ा में खरीफ सीजन गंभीर संकट का सामना कर रहा है. सबसे चिंताजनक स्थिति लातूर और धाराशिव जिलों की है, जहां आधे से अधिक क्षेत्र में अब तक बुवाई नहीं हो सकी है. वहीं नांदेड़ जिले में 74 प्रतिशत बुवाई के साथ सबसे बेहतर स्थिति देखने को मिल रही है. पूरे मराठवाड़ा में अब भी 20 लाख 19 हजार 526 हेक्टेयर, यानी 41 प्रतिशत क्षेत्र बुवाई की प्रतीक्षा में है. (गणेश सुभाष जाधव की रिपोर्ट)
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