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इस खास आम की वैरायटी से बदली बाराबंकी के किसान की किस्मत, एक सीजन में 60 लाख की हो रही कमाई

इस खास आम की वैरायटी से बदली बाराबंकी के किसान की किस्मत, एक सीजन में 60 लाख की हो रही कमाई

एक सीजन में 40 टन से अधिक उत्पादन हो जाता है. गोरखपुर, देवरिया गोंडा और नेपाल देश तक हम लोगों के आमों की सप्लाई होती है. कुछ बड़े व्यापारी दिल्ली और कोलकाता सेआते है, वो बाग में आमों का सौदा कर लेते हैं. 

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बाराबंकी में आम के प्रगितिशिल किसान मोहम्मद अलीम किदवई (Photo-Kisan Tak) बाराबंकी में आम के प्रगितिशिल किसान मोहम्मद अलीम किदवई (Photo-Kisan Tak)

Mango Farmer Story: परंपरागत खेती के अलावा आम की खेती कर भी सालाना लाखों का मुनाफा कमाया जा सकता है. इसका उदाहरण यूपी के बाराबंकी जिले के सफल किसान मोहम्मद अलीम किदवई हैं, जिन्होंने 100 एकड़ में आम का बागीचा लगाया हुआ है. इससे उन्हें सालाना 50 से 60 लाख तक कि कमाई हो जाती है. इंडिया टुडे के किसान तक से खास बातचीत में मोहम्मद अलीम ने बताया कि आम सबका पसंदीदा फल होता है. और यही कारण है कि इसे फलों का राजा भी कहा जाता है. उन्होंने बताया कि दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम की बागवानी पिछले कई सालों से अपनी पुश्तैनी जमीन पर करते आ रहे है, हम लोगों का संयुक्त परिवार है, सभी लोग परिवार के सदस्य आम की खेती करते है.

एक सीजन में 40 टन से अधिक का उत्पादन

बाराबंकी जिले के नवाबगंज तहसील के बयारा गांव निवासी मोहम्मद अलीम बताते हैं कि हमारे परिवार में 15 सदस्य है. सब मिलकर आम का कारोबार कर रहे है. दरअसल दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम की डिमांड मार्केट में ज्यादा रहती है. इसलिए हम वैरायटी की बागवानी कई वर्षों से कर रहे है. एक सीजन में 40 टन से अधिक उत्पादन हो जाता है. गोरखपुर, देवरिया गोंडा और नेपाल देश तक हम लोगों के आमों की सप्लाई होती है. कुछ बड़े व्यापारी दिल्ली और कोलकाता सेआते है, वो बाग में आमों का सौदा कर लेते हैं. 

आम की फसल को बारिश का इंतजार

बाराबंकी में आम के प्रगितिशिल किसान मोहम्मद अलीम किदवई ने बताया जलवायु परिवर्तन और मौसम में बदलाव के चलते दशहरी के अलावा लंगड़ा चौसा समेत अन्य प्रजाति के आम को काफी नुकसान हुआ है. अभी मॉनसून आने में समय है, अगर 20 से 25 जून तक बारिश हो जाती है, तो आम की फसल का उत्पादन अच्छा होगा. क्योंकि बारिश के बाद आम का साइज और टेस्ट बिल्कुल बदल जाता है. आम काफी मीठा और रसीला हो जाता है. लंगड़ा आम जुलाई के महीने में मार्केट में आ जाएगा. तो वहीं चौसा आम की बात की जाए तो अगस्त तक आने का अनुमान है. 

पौधों की रखवाली और उसकी सिंचाई आवश्यक

उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोगों का मानना है कि आम में हर एक साल के बाद फलन होता है. जबकि ऐसा नहीं है. उनका दावा है कि अगर पौधों की अच्छे से रखरखाव और देखभाल की जाए तो हर साल आम का फलन होगा. उन्होंने बताया कि मंजर शुरू होने से चार माह पूर्व से ही पौधों की रखवाली और उसकी सिंचाई शुरू कर दी जाती है. समय-समय पर जरूरी दवा का छिड़काव भी करना होता है, ताकि किसी भी प्रकार के कीट या रोग इत्यादि नहीं लगे और फलों की चमक बरकरार रहे. इससे बाजार में इसकी कीमत अच्छी मिलती है. आपको बता दें कि भारत में अगर आम की वैरायटी के बाद की जाए. तो यह 1000 के आसपास हैं.भारत में सबसे ज्यादा आम की खेती की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश में होती है. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दशहरी आम उगाया जाता है.

ऐसे बढ़ेगी आम की पैदावार

किसान अलीम ने आगे बताया कि आम के फसल की शुरुआती दौर में देखरेख से आम कि फसल में कीट लगने की संभावना कम होती है. इसके लिए प्लेनोफिक्स उर्वरक का छिडकाव कर हर पेड़ की अच्छे से गुडाई करनी चाहिए. आम की फसल के बेहतर प्रबंधन के लिए किसान रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं. इसके साथ ही फसल प्रबंधन के लिए किसानों को आम के पेड़ के चारो तरफ 2 -2 इंच गुडाई भी करनी चाहिए, इससे भी फसल में पैदावार बढाईं जाती है.