सेब बागवानों ने 35 करोड़ की सब्सिडी न मिलने पर गांधी पार्क से कृषि मंत्री गणेश जोशी के आवास तक निकाला मार्च, पुलिस ने रोका. मंत्री ने कहा — अधिकारी सस्पेंड, वेरिफिकेशन शुरू, 57.30 करोड़ का भुगतान जल्द.
ICAR-IISWC: विकसित कृषि संकल्प अभियान के माध्यम से किसानों की समस्याएं सुलझाई जा रही हैं. इसका मकसद है मुख्य कृषि चुनौतियों का समाधान करके और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देकर, संस्थान का उद्देश्य खरीफ फसल की योजना को बढ़ाना, मॉनसून की तैयारी सुनिश्चित करना और ज्ञान आधारित खेती को बढ़ावा देना है, जिससे उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में कृषक समुदायों की आजीविका सुरक्षित हो सके.
उत्तराखंड राज्य बाजरा नीति के तहत सरकार ने साल 2030-31 तक 11 पर्वतीय जिलों के लिए 134.89 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है. मंडुआ, झंगोरा, रामदाना, कौणी और चेना जैसी फसलें उगाने वाले किसानों को बीज और जैव-उर्वरकों पर 80 परसेंट सब्सिडी मिलेगी.
केवल पहले 5 महीनों में 79,530 किलो मटन, चिकन और ट्राउट मछली की सप्लाई की गई है. इसमें 42,748 किलो मटन, 29,407 किलो चिकन और 7,374 किलो ट्राउट मछली शामिल है. इसी से इन किसानों ने 2.6 करोड़ रुपये की कमाई कर डाली!
इन राज्यों और क्षेत्रों में बाहरी लोगों पर भूमि खरीदने के प्रतिबंध लगाने के कई महत्वपूर्ण कारण हैं. जैसे कई राज्य और जनजातीय क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा के लिए भूमि सुरक्षा कानून लागू करते हैं.
पीएम मोदी ने कहा, उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है जहां हम दिव्यता और विकास दोनों को एक साथ अनुभव करते हैं. आकांक्षी भारत अस्थिरता की बजाय स्थिर सरकार चाहता है. उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार एक दूसरे के प्रयासों को बढ़ा रहे हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, मेक इन इंडिया की तर्ज पर वेड इन इंडिया आंदोलन शुरू करें. हाउस ऑफ हिमालयाज वोकल फॉर लोकल और लोकल फॉर ग्लोबल की हमारी अवधारणा को और मजबूत करता है. यही समय है, सही समय है. यह भारत का समय है.
धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि उधम सिंह नगर के विधानसभा बाज़पुर की 5838 एकड़ और 20 गांव की जमीन को बचाने की मुहिम की शुरुआत हो चुकी है. भूमि बचाओ मुहिम के समर्थन में मंगलवार को 20 गांव के ज़मीनी मुद्दे से जुड़े लोग अनाज मंडी में जमा हुए. दो दिन से किसानों का धरना चल रहा है.
subsidy on small polyhouses: पॉलीहाउस (Polyhouse) किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें किसी भी फसल को किसी भी सीजन में लगा सकते हैं और अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं. वहीं उत्तराखंड सरकार ने छोटे पॉलीहाउस बनाने के लिए किसानों को 70 प्रतिशत सब्सिडी देने का फैसला किया है. इससे राज्य के लगभग एक लाख किसानों को लाभ होगा.
उत्तराखंड में किसान तेजी से खेती छोड़ रहे हैं. इसकी वजह है कि बंदर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. साथ ही जलवायु परिवर्तन ने खेती-बाड़ी को चौपट कर दिया है. खेती में घाटे ने भी लोगों को परेशान किया है. फूलों की खेती शुरू होने से किसानों को फायदा होगा और वे खेती में रुझान बढ़ाएंगे.
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